ईरान ने युद्ध रोकने, होर्मुज को खोलने के लिए नया प्रस्ताव दिया

तेहरान, 27 अप्रैल (वार्ता) ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिका के सामने एक नया प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत ईरान ने अपने सबसे विवादास्पद मुद्दे (परमाणु कार्यक्रम) को अस्थायी रूप से ठंडे बस्ते में डालने की बात कही है। वार्ता से परिचित अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तानी और क्षेत्रीय मध्यस्थों के माध्यम से भेजे गए इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी में ढील देने के बदले में विस्तारित संघर्ष विराम या शत्रुता को स्थायी रूप से समाप्त करने की बात की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, यूरेनियम संवर्धन और ईरान के भंडार पर चर्चा को फिलहाल टाल दिया जाएगा और इस पर बाद में होने वाली बैठक में चर्जा की जाएगी।

ईरान के साथ कूटनीतिक गतिरोध के बीच, नाकेबंदी हटाने और युद्ध समाप्त करने से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भविष्य की किसी भी बातचीत में अपना वह प्रभाव खो सकते हैं, जिसका उपयोग वे ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाने और तेहरान को संवर्धन स्थगित करने के लिए मनाने में करना चाहते हैं। ये दोनों ट्रंप के प्राथमिक युद्ध उद्देश्य रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, श्री ट्रंप सोमवार को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अपनी शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति टीम के साथ ईरान पर एक बैठक कर सकते हैं। रविवार को फॉक्स न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखना चाहते हैं, जो ईरान के तेल निर्यात को रोक रही है। उन्हें उम्मीद है कि इससे अगले कुछ हफ्तों में ईरान झुक जाएगा। ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संकट तब और गहरा गया जब इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतों स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर तथा ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी। श्री ट्रंप ने यह यात्रा रद्द करते हुए कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रतिनिधिमंडल भेजने का कोई खास मतलब नहीं है।

श्री अराघची ने रविवार को मस्कट में ओमानी अधिकारियों के साथ बातचीत की, जो होर्मुज जलडमरूमध्य पर केंद्रित थी। इसके बाद वह दूसरे दौर की बातचीत के लिए फिर से इस्लामाबाद पहुंचे। इसके बाद अराघची के मॉस्को जाने और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों का कहना है कि इस्लामाबाद में हुई चर्चाओं के दौरान ही परमाणु मुद्दे को किनारे करने का विचार पहली बार विस्तार से उठाया गया था। पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की और कतर के मध्यस्थों को बताया गया कि ईरान में आंतरिक मतभेदों के कारण संवर्धन सीमा या उच्च संवर्धित यूरेनियम को हटाने पर किसी भी तत्काल समझौते में जटिलता आ रही है। व्हाइट हाउस को यह प्रस्ताव मिल गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वह इस पर विचार करने को तैयार है या नहीं। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने कहा, “ये संवेदनशील कूटनीतिक चर्चाएं हैं और अमेरिका प्रेस के माध्यम से बातचीत नहीं करेगा। जैसा कि राष्ट्रपति ने कहा है, अमेरिका के पास मजबूत स्थिति है और वह केवल ऐसा सौदा करेगा जो अमेरिकी लोगों के हित में हो और ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने की अनुमति न दे।”

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