1 लाख में खरीदी मासूम, 2 साल बाद सड़क पर फेंका, खुला मानव तस्करी का खौफनाक खेल

श्योपुर। नेशनल हाईवे-552 के किनारे दो साल की एक बच्ची के लावारिस हालत में मिलने से शुरू हुई जांच अब एक बड़े मानव तस्करी नेटवर्क तक जा पहुंची है। पुलिस के मुताबिक, जिस बच्ची को सड़क किनारे छोड़ा गया, उसे करीब दो साल पहले महज 1 लाख रुपये में खरीदा गया था। सबसे हैरानी की बात यह है कि जिस दंपती ने उसे खरीदा, उन्होंने ही बाद में उसे ‘मनहूस’ मानकर छोड़ दिया। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।

जांच में सामने आया है कि यह बच्ची कई हाथों से होते हुए आखिरकार खरीदार तक पहुंची थी। पुलिस के अनुसार, नवजात को पहले एक महिला के जरिए दूसरे व्यक्ति को सौंपा गया, फिर इंदौर में ब्यूटी पार्लर चलाने वाली महिला और उसके पति के माध्यम से इसे एक कारोबारी दंपती को बेचा गया। इस पूरी प्रक्रिया में कई लोग शामिल थे, जिन्होंने एक मासूम को सामान की तरह बेचने का काम किया। यह नेटवर्क इंदौर, धार, खरगोन और श्योपुर जैसे कई जिलों में फैला हुआ बताया जा रहा है। फिलहाल इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनसे पूछताछ जारी है।

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने हाईवे के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू की। एक संदिग्ध कार की गतिविधि पर शक हुआ, जो थोड़ी देर रुककर आगे बढ़ती दिखी। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने वाहन मालिक तक पहुंच बनाई और फिर पूरी कड़ी जुड़ती चली गई। महज 35 घंटे के भीतर पुलिस की अलग-अलग टीमों ने कई जिलों में दबिश देकर छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें एक कारोबारी दंपती, पार्लर संचालिका और अन्य सहयोगी शामिल हैं। पुलिस की कार्रवाई से मामले की कई अहम परतें सामने आई हैं। अब पुलिस इस मामले के मेडिकल कनेक्शन की भी गहराई से जांच कर रही है। शक है कि नवजात को अस्पताल से ही अवैध तरीके से बाहर निकाला गया होगा। इसके लिए डिलीवरी रिकॉर्ड, जन्म रजिस्टर और अस्पताल से छुट्टी के दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

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