टोक्यो: जापान में 465 सीटों वाले निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की नई संरचना तय करने के लिए कल रविवार को देश भर में संसदीय चुनाव कराए जाएंगे। यह चुनाव सत्तारूढ़ दलों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके परिणाम से सरकार की स्थिरता और नीतिगत दिशा दोनों प्रभावित होंगी। प्रधानमंत्री साने ताकाइची की अगुवाई वाली लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) अपने सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी के साथ मिलकर संसद में मजबूत बहुमत हासिल करने की कोशिश में जुटी है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यदि यह गठबंधन कम से कम 261 सीटें जीत लेता है तो उसे स्पष्ट और स्थिर बहुमत मिल जाएगा। ऐसी स्थिति में संसदीय समितियों पर भी उसका नियंत्रण मजबूत हो जाएगा, जिससे विधायी प्रक्रिया में सरकार को कम बाधाओं का सामना करना पड़ेगा और नीतिगत फैसले तेजी से लागू किए जा सकेंगे। दूसरी ओर, बहुमत से कम सीटें आने की स्थिति में विपक्ष को सरकार पर दबाव बनाने का अवसर मिल सकता है।
इस चुनाव की एक खास बात मौसम से जुड़ी चुनौती भी है। वर्ष 1990 के बाद यह पहला अवसर है जब जापान में कड़ाके की सर्दी के बीच आम चुनाव हो रहे हैं। उत्तरी और पश्चिमी जापान के कई इलाकों में रिकॉर्ड बर्फबारी दर्ज की गई है, जिससे मतदान प्रतिशत प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। चुनाव आयोग ने मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए कई क्षेत्रों में विशेष व्यवस्थाएं की हैं ताकि मतदाता सुरक्षित तरीके से अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।कुल मिलाकर यह चुनाव न केवल राजनीतिक दलों के लिए शक्ति परीक्षण है, बल्कि जापान की आगामी नीतियों, आर्थिक दिशा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी इसका दूरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना मानी जा रही है।
