छतरपुर के गांवों में गहराया जल संकट, बूंद-बूंद पानी के लिए जूझ रहे ग्रामीण

छतरपुर: जिले में भीषण गर्मी के बीच जल संकट विकराल रूप लेता जा रहा है। शहर से महज 3 से 5 किलोमीटर दूर स्थित गौरैया और पठापुर जैसे गांवों में पेयजल की भारी किल्लत ने ग्रामीणों का जीवन संकट में डाल दिया है। विकास के दावों के बीच इन गांवों की स्थिति यह है कि यहां के लोग रोजाना 1 से 2 किलोमीटर दूर जाकर पानी लाने को मजबूर हैं।करीब 1200 से 1500 की आबादी वाले इन गांवों में लगे 7 से 8 हैंडपंप या तो सूख चुके हैं या खराब पड़े हैं। ऐसे में महिलाओं का अधिकांश समय पानी की व्यवस्था में बीत रहा है, जबकि बच्चे स्कूल से लौटने के बाद पढ़ाई छोड़कर पानी ढोने में लग जाते हैं। कई ग्रामीण जंगलों में बनी झिरियों से गंदा पानी लाने को मजबूर हैं, जिसका उपयोग मवेशी भी करते हैं।

बक्सवाहा क्षेत्र में जल संकट का सामाजिक प्रभाव भी साफ दिखाई दे रहा है। पानी की कमी के कारण शादियां टल रही हैं और रोजगार की तलाश में पलायन बढ़ रहा है। गौरैया गांव में कई परिवारों ने पानी संग्रहण के लिए निजी टैंक बनवाए हैं, जिन्हें भरवाने के लिए 300 से 500 रुपये तक खर्च कर टैंकर मंगाने पड़ रहे हैं।जल जीवन मिशन और नल-जल योजनाओं की जमीनी हकीकत भी निराशाजनक है।

पाइपलाइन बिछने और कनेक्शन मिलने के बावजूद अब तक घरों तक पानी नहीं पहुंचा है। कई स्थानों पर पानी की टंकियों का निर्माण अधूरा है, जबकि पाइपलाइन के लिए खोदी गई सड़कें भी अब तक ठीक नहीं की गई हैं।एक ओर शहर में नियमित जल आपूर्ति हो रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं। बढ़ती गर्मी और 43 डिग्री से अधिक तापमान ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र स्थायी समाधान की मांग की है।

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