इंदौर: शहर में स्वच्छता अभियान को लेकर आज महापौर ने शहर के हॉस्टल और कोचिंग संचालकों के साथ बैठक की. बैठक में हॉस्टल से कचरा सीधे सड़कों पर फैंकने की सबसे बड़ी समस्या अधिकारियों ने बताई. साथ ही कचरे को अलग नहीं करने की पर कचरा नहीं उठाने के चेतावनी भी दी गई.आज महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सिटी बस कार्यालय में हॉस्टल और कोचिंग संस्थानों के संचालकों के साथ स्वच्छता संवाद किया.
महापौर भार्गव ने कहा कि शहर की स्वच्छता के सामने सबसे बड़ी चुनौती हॉस्टल्स हैं, जहां रहने वाले छात्र अक्सर कचरा सड़कों पर फेंक देते हैं. बैठक में नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि कचरा संग्रहण के लिए गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण अनिवार्य है. यदि यह नियम नहीं माना जाएगा तो कचरा नहीं उठाया जाएगा. बैठक में हॉस्टल कोचिंग संचालकों ने कहा कि सभी हॉस्टल इंदौर की स्वच्छता के लिए उनके साथ है. वहीं कुछ संचालको द्वारा कचरे को लेकर एक नियमावली बनाने का सुझाव दिया, जो छात्रों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का काम करेगी.
महापौर ने कहा कि इंदौर एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र है और छात्रों को स्वच्छता एंबेसडर के रूप में तैयार किया जाए. महापौर भार्गव ने हॉस्टल संचालकों से कहा कि सभी हॉस्टल में से जो भी हॉस्टल अपने परिसर जीरो वेस्ट या सिंगल प्लास्टिक फ्री करता है. सर्वेक्षण के बाद अच्छा काम करने वाले तीन हॉस्टल्स को पुरस्कृत किया जाएगा.
संवाद में सामने आई ये समस्याएं
– खुले में कचरा फेंकना
– गीला-सूखा कचरा अलग न करना
– सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का अधिक उपयोग
– सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी (रेड/येलो स्पॉट)
अधिकारियों ने संचालकों को बताया सफाई का तरीका
– हर हॉस्टल में पर्याप्त डस्टबिन और कलेक्शन पॉइंट अनिवार्य हों
– नियमित सफाई और निगरानी
– दुकानदार कचरा प्रबंधन में जिम्मेदारी निभाएं
– नियमों का उल्लंघन करने पर चालान और कार्रवाई होगी.
