शहर की प्यास बुझाने वाला यशवंत सागर अब बदहाल, गंदगी, अतिक्रमण और जलकुंभी ने बिगाड़ी सूरत

शैलेन्द्र कश्यप

इंदौर: शहर की जल आपूर्ति का एक अहम स्रोत यशवंत सागर तालाब आज अपनी बदहाल स्थिति के कारण चिंता का विषय बनता जा रहा है. एक ओर यह तालाब शहर के कई इलाकों की प्यास बुझाता है, तो दूसरी ओर इसकी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता लोगों को यहां आने के लिए आकर्षित करती है.लेकिन बढ़ती लापरवाही और जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह खूबसूरत जलस्रोत धीरे-धीरे गंदगी और अव्यवस्था की चपेट में आ रहा है. तालाब के किनारों पर पहुंचते ही जहां पहले स्वच्छ पानी और शांत वातावरण का एहसास होता था, वहीं अब कई जगहों पर फैली गंदगी साफ नजर आती है. लोग यहां घूमने और समय बिताने आते हैं, लेकिन अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय प्लास्टिक, खाने-पीने का कचरा और शराब की खाली बोतलें यहीं छोड़कर चले जाते हैं. शाम होते-होते कुछ जगहों पर शराब पार्टियां भी होती हैं, जिनके बाद तालाब परिसर कचरे से भर जाता है. सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने के कारण ऐसे लोगों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही है.
प्रतिबंध के बावजूद पकड़ते हैं मछली
मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के बावजूद तालाब में यह गतिविधि खुलेआम जारी है, कई लोग सुबह और शाम के समय जाल डालकर मछलियां पकड़ते नजर आते हैं. इतना ही नहीं, वे इन्हें वहीं सड़क किनारे बेचते भी दिखाई देते हैं. हैरानी की बात यह है कि निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारी अक्सर मौके से गायब रहते हैं, जिससे नियमों का उल्लंघन लगातार बढ़ रहा है.
तेजी से फैल रही जलकुंभी
सफाई व्यवस्था की हालत भी बेहद खराब है. गर्मी के मौसम में भी तालाब में जलकुंभी तेजी से फैल रही है. यह जलकुंभी पानी की गुणवत्ता को खराब करती है और जलस्रोत के लिए गंभीर समस्या बन जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते इसे नहीं हटाया गया तो बारिश के मौसम में यह चार गुना तेजी से फैल सकती है, जिससे बाद में इसे साफ करना बेहद मुश्किल हो जाएगा. इसके बावजूद अब तक इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है.
पाल पर अतिक्रमण
तालाब की पाल पर अतिक्रमण भी एक बड़ी समस्या बन चुका है. कई जगहों पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है, जिससे न सिर्फ तालाब का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरा बढ़ रहा है. इन अतिक्रमणों के कारण गंदगी और कचरा भी तेजी से फैल रहा है, जो तालाब के पानी को प्रभावित कर रहा है.
ऐसे पहुंचाते हैं पानी
यशवंत सागर तालाब का पानी देवधर्म टेकरी स्थित ट्रीटमेंट प्लांट तक लाया जाता है, जहां क्लोरीनेशन की प्रक्रिया के माध्यम से इसे शुद्ध किया जाता है। इसके बाद यह पानी बीएसएफ, संगम नगर, पल्हर नगर और किला मैदान स्थित पानी की टंकियों में भेजा जाता है. यहां से यह पानी विभिन्न कॉलोनियों में पहुंचकर हजारों लोगों की प्यास बुझाता है.
भविष्य के लिए गंभीर संकेत
स्पष्ट है कि जिस तरह से यहां गंदगी, अवैध गतिविधियां और लापरवाही बढ़ रही है, वह भविष्य के लिए गंभीर संकेत है. यदि समय रहते प्रशासन और जिम्मेदार विभागों ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में इस महत्वपूर्ण जलस्रोत की स्थिति और भी खराब हो सकती है. साथ ही, आम नागरिकों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए तालाब की स्वच्छता और संरक्षण में सहयोग करना होगा, तभी यशवंत सागर अपनी पहचान और उपयोगिता को बरकरार रख पाएगा.
सतत निगरानी, सर्विलांस कैमरे लगाने की योजना
आशीष पाठक
एडिशनल कमिश्नर आशीष पाठक ने बताया कि यशवंत सागर तालाब से करीब 35 एमएलडी पानी लिया जा रहा है. यह तालाब नगर निगम सीमा के बाहर होने के कारण यहां की व्यवस्थाएं स्थानीय स्तर पर संचालित की जाती हैं और समय-समय पर सफाई करवाई जाती है. हाल ही में जलकुंभी की समस्या उठने पर अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए बारिश से पहले इसे हटाने की बात कही है. उन्होंने बताया कि तालाब के आसपास हो रहे अवैध निर्माण का मुद्दा पहले भी दिशा समिति की बैठक में उठाया गया था, जिसमें सांसद शंकर लालवानी भी शामिल थे. क्षेत्र नगर निगम सीमा से बाहर होने के कारण कार्रवाई की जिम्मेदारी एडीएम को दी जा रही है. अतिक्रमण हटाने के लिए संयुक्त अभियान चलाने की तैयारी भी की जा रही है. साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) से जुड़े कार्य जल्द शुरू करने की बात कही गई है. मछली पकड़ने के मामलों में वैधानिक जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है. भविष्य में ऐसी समस्याएं न हों, इसके लिए सतत निगरानी, सर्विलांस कैमरे लगाने और कर्मचारियों की तैनाती बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है. हालांकि, अधिकारियों के जवाबों को लेकर अब भी स्पष्टता की कमी और गोलमोल रवैया सामने आ रहा है.
ठोस कचरा प्रबंधन सख्ती से लागू हो
दिलीप वाघेला
यशवंत सागर जैसे संवेदनशील आर्द्रभूमि क्षेत्र में अनियंत्रित पर्यटन और कचरा प्रबंधन की कमी जल गुणवत्ता, जैव विविधता और पेयजल सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है. जलकुंभी का अत्यधिक फैलाव जल में ऑक्सीजन की कमी उत्पन्न कर जलीय जीवन को प्रभावित करता है, जबकि प्लास्टिक प्रदूषण दीर्घकालिक पारिस्थितिक क्षति का कारण बनता है. अतः आवश्यक है कि ठोस कचरा प्रबंधन को सख्ती से लागू किया जाए, पर्यटकों के लिए नियंत्रित प्रवेश, प्लास्टिक कैरी बैग आदि पर रोक, लिटर बिन्स लगाने के साथ जागरूकता बढ़ाई जाए. जलकुंभी के नियमित निष्कासन और जैव-नियंत्रण उपाय अपनाए जाएं, ताकि रामसर साइट एवं महत्वपूर्ण जलस्रोत यशवंत सागर का पारिस्थितिक संतुलन और जल गुणवत्ता संरक्षित रह सके.
डॉ. दिलीप वागेला, विशेषज्ञ सदस्य, जिला वेटलैंड संरक्षण समिति, इंदौर

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