तेहरान/वाशिंगटन 26 अप्रैल (वार्ता) पश्चिम एशिया में इजरायल और अमेरिका के साथ संघर्ष के दौरान ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उपकरणों को ‘व्यापक’ नुकसान पहुँचाया है।
एनबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को ईरान पर शुरू हुए संयुक्त हमलों के बाद से उसकी जवाबी कार्रवाई में अमेरिका को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है।
अमेरिकी अधिकारियों और मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के हमलों से हुआ नुकसान सार्वजनिक रूप से स्वीकार किए गए आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर है। उन्नत और परिष्कृत रक्षा प्रणालियों के बावजूद, इन सैन्य ठिकानों की मरम्मत में अरबों डॉलर खर्च होने का अनुमान है। ईरान ने कथित तौर पर पश्चिम एशिया के कम से कम सात देशों में स्थित प्रमुख सैन्य स्थलों, गोदामों, कमांड सेंटरों, विमान हैंगरों, संचार उपकरणों और रडार प्रणालियों को निशाना बनाया है।
एक चौंकाने वाली घटना में, ईरान का एक पुराना एफ-5 लड़ाकू विमान अमेरिका की अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों को चकमा देने और हवाई हमला करने में सफल रहा। हालांकि इस हमले से हुआ नुकसान कम बताया जा रहा है, लेकिन अमेरिका की नवीनतम सैन्य तकनीक में सेंध लगाना ईरान के लिए एक बड़ी उपलब्धि और अमेरिका के लिए भारी शर्मिंदगी का सबब बन गया है। अमेरिकी युद्ध विभाग और सेंट्रल कमांड ने हालांकि अभी तक नुकसान के विवरण पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, रिपब्लिक पार्टी के कुछ सांसद युद्ध की दिशा और इस पर साधी गई चुप्पी से असंतुष्ट हैं। उन्होंने युद्ध विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नुकसान या मरम्मत की लागत की जानकारी साझा न करने पर नाराजगी जताई है। एक सांसद के अनुसार, युद्ध विभाग बजट की मांग कर रहा है, लेकिन हफ़्तों से पूछने के बावजूद नुकसान का कोई विशिष्ट विवरण नहीं दिया गया है।
माना जा रहा है कि नुकसान का ब्यौरा सार्वजनिक होने से ईरान जैसे प्रतिद्वंद्वी के इतने करीब अमेरिकी ठिकाने बनाए रखने के नफे-नुकसान पर बहस तेज हो सकती है। युद्ध विभाग ने इस युद्ध के लिए कांग्रेस से 200 अरब डॉलर से अधिक की मांग की है।
गौरतलब है कि अमेरिका युद्ध के पहले हफ्ते में ही 11 अरब डॉलर से अधिक खर्च कर चुका है, जो इसे अमेरिका के लिए एक अत्यंत खर्चीला युद्ध बना चुका है। अमेरिकी कांग्रेस पहले ही वर्ष 2026 के लिए 838.5 अरब डॉलर के रक्षा बजट को मंजूरी दे चुकी है।
