
जबलपुर। शहर में भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया। आसमान से आग बरस रही है। सूरज के तेवर इतने तल्ख हो गए हैं कि आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। पारा चढऩे का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा और गर्मी हर दिन अपने ही पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर रही है। रविवार को सीजन का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड किया गया। पारे ने अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए और सीधे 43.5 डिग्री पर पहुंच गया जो सामान्य से 3 डिग्री अधिक रहा। दिन में गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाया। तपिश और लू के थपेड़ों ने बेचैनी बढ़ाई । गर्म हवाएं लोगों को दि नभर झुलसाती रही। बिना कूलर, पंखे, एसी के रहने मुश्किल था । न्यूनतम तापमान 25 डिग्र्री पर पहुंच गया जो सामान्य से 1 डिग्री कम रहा । सुबह के वक्त आद्रता 34 और शाम को 23 प्रतिशत दर्ज की गई। उत्तर-पश्चिमी हवाएएं 4 से 5 किमी की रफ्तार से चली।
दिन में सडक़ों पर सन्नाटा, लू का कहर
दिन में सूरज की तपिश इतनी तीखी रही कि लोग जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकले वे भी गमच्छा, टोपी, चश्मा लगाये हुए थे। अधिकांश सडक़ों पर सन्नाटा पसरा हुआ था। दोपहर होते-होते लू के थपेड़ों के कारण सडक़ों पर आवाजाही काफी कम थी। दिन में शहर के मुख्य बाजार और चौराहे सूने नजर आ आए हालांकि शाम को जरूर लोग बाहर निकले ।
सेहत पर असर, अस्पतालों में बढ़ रहे मरीज
गर्मी का सीधा असर सेहत पर दिख रहा है। लू की चपेट में आने से डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। लू की चपेट में आने से अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और तेज बुखार के मरीजों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ है। ऐसे मौसम में सावधानी बरतने की जरूरी है । यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करें और खुद को सीधी धूप से बचाकर रखें।
ये सिस्टम है सक्रिय
मौसम विभाग की माने तो पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्र के ऊपर स्थित ऊपरी वायु चक्रवातीय परिसंचरण, जो समुद्र तल से 1.5 किमी तक फैला हुआ है, अभी भी बना हुआ है। पूर्वी बिहार और आसपास के क्षेत्र के ऊपर स्थित ऊपरी वायु चक्रवातीय परिसंचरण अब उत्तर-पूर्व झारखंड और आसपास के क्षेत्र पर 0.9 किमी ऊँचाई पर स्थित है। आंतरिक महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्र के ऊपर 3.1 से 5.8 किमी ऊँचाई के बीच स्थित प्रति-चक्रवातीय परिसंचरण बना हुआ है। मध्य प्रदेश के मध्य भागों के ऊपर 1.5 किमी ऊँचाई पर एक ऊपरी वायु चक्रवातीय परिसंचरण स्थित है।
