
भोपाल। युद्ध भूमि में गिरते सैनिकों और छिनती इंसानियत के बीच एक सवाल मंच से उठता है क्या बिना खून बहाए युद्ध रोका जा सकता है। इसी संवेदनशील सोच के साथ नाटक यह तो चमत्कार है का पहला मंचन रंगश्री लिटिल भोपाल में हुआ। वसीम खान द्वारा लिखित और निर्देशित यह नाटक केवल मनोरंजन, व्यंग और समाज की उपलब्धियों पर तंज नहीं बल्कि युद्ध के खिलाफ इंसानियत का मंचीय बयान है ।
नाटक की शुरुआत कपड़ा बम की कल्पना से होती है जो हथियार होकर भी हत्या नहीं करता बल्कि युद्ध को रोकने का प्रयास है।
कथा एक शिक्षित परिवार से शुरू होती है जहां रिमझिम नाम की बहू पढ़ाई में अव्वल है और परिवार के सहयोग से वैज्ञानिक बनने का सपना देखती है। पति बादल भी वैज्ञानिक है जो परमाणु बम पर शोध कर रहा है। रिमझिम इसके विपरीत ऐसा शोध करना चाहती है जो मानव जीवन को बचा सके। संघर्ष रिश्तों से भी है और हालात से भी।
शोध के लंबे प्रयासों के बाद रिमझिम कपड़ा बम बनाने में सफल होती है। इस बम का असर केवल कपड़ों पर होता है जिससे सैनिक और आम लोग युद्ध के लिए बाहर नहीं आ पाते। युद्ध ठहर जाता है और दुश्मन देश बिना एक भी जान गवाए शर्म के मारे हार मान लेता है। नाटक में हास्य व्यंग्य के साथ तीखे संवाद और मानवीय पीड़ा को प्रभावी ढंग से पिरोया गया। युद्ध के साथ राजनीति पर तंज कसते दृश्य और विधायकों पर गिरता कपड़ा बम दर्शकों को असल राजनीति की स्थितियों और नेताओं ए कामों पर तंज भी कसता है। कुल पंद्रह कलाकारों की प्रस्तुति ने पहले मंचन को यादगार बना दिया।
