सूर्य के दैत्याकार धब्बे से रूबरू हुए छात्र

भोपाल। जब विज्ञान की पढ़ाई किताबों से निकलकर आकाश की सच्ची घटनाओं से जुड़ती है तो जिज्ञासा रोमांच में बदल जाती है। आंचलिक विज्ञान केन्द्र गुरुवार को ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। जब विद्यार्थियों ने सूर्य पर बने विशाल सनस्पॉट एआर चार तीन छह छह का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। कक्षा में पढ़ी गई भौतिकी और खगोल विज्ञान की अवधारणाएं जब सूर्य की सतह पर जीवंत रूप में दिखीं तो कई छात्रों की आंखों में वैज्ञानिक बनने का सपना साफ नजर आया।

विशेष सत्र में छात्रों ने सूर्य की सतह पर मौजूद उस दैत्याकार धब्बे को देखा। जो आकार में इतना बड़ा है कि अपने भीतर कई पृथ्वियों को समाहित कर सकता है। यह अनुभव केवल देखने तक सीमित नहीं रहा बल्कि सूर्य की चुंबकीय ऊर्जा और उसकी तीव्र गतिविधियों को समझने का अवसर भी बना।

विशेषज्ञों ने बताया कि यही सनस्पॉट हाल के समय की सबसे शक्तिशाली एक्स क्लास सौर ज्वालाओं का स्रोत रहा है। ऐसी ज्वालाएं पृथ्वी के स्पेस वेदर उपग्रह संचार नेविगेशन प्रणाली और विद्युत आपूर्ति को प्रभावित कर सकती हैं। इस गतिविधि से छात्रों ने पहली बार जाना कि सूर्य पर होने वाली घटनाएं सीधे मानव जीवन और आधुनिक तकनीक से जुड़ी हैं। सत्र के दौरान यह भी समझाया गया कि भविष्य में नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप जैसे अत्याधुनिक उपकरण सूर्य की गतिविधियों का और गहराई से अध्ययन संभव बनाएंगे।

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