मौत से तीन बार लौटा उज्जैन का बेटा, आज ‘मन की बात’ में गूंजेगा संघर्ष


उज्जैन: महाकाल की नगरी से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो सिर्फ उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और संकल्प की जीवंत दास्तान है. उज्जैन के 37 वर्षीय अविनाश टाटावत का नाम अब पूरे देश में गूंजने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में अविनाश के संघर्ष और सफलता का जिक्र करेंगे.

अविनाश की जिंदगी का सबसे कठिन दौर 2011 में शुरू हुआ, जब उन्हें गंभीर किडनी बीमारी ने जकड़ लिया। हालात इतने बिगड़े कि जिंदगी और मौत के बीच जंग छिड़ गई. इस मुश्किल समय में 65 वर्षीय पिता कैलाश टाटावत ने वो किया, जो हर किसी के बस की बात नहीं- उन्होंने अपनी किडनी बेटे को दान कर दी.

प्रधानमंत्री ने भेजी मदद
आर्थिक संकट भी सामने था. इलाज के लिए पैसे नहीं थे. ऐसे में अविनाश ने प्रधानमंत्री कार्यालय तक गुहार लगाई. मदद मिली, संबल मिला और राशि आई फिर 2023 में गुजरात के नडियाड में सफल किडनी ट्रांसप्लांट हुआ.

कोरोना और हादसा फिर भी नहीं टूटा हौसला
संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ. 2020 में कोरोना ने घेरा,अविनाश ने उसे भी मात दी. फिर एक सड़क हादसा हुआ,भोपाल जाते समय डोडी के पास कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई, बावजूद अविनाश फिर भी बच निकले.

 

बीमारी से चैंपियन तक का सफर
जिंदगी मिली तो अविनाश ने उसे सिर्फ जिया नहीं, बल्कि उसे मुकाम दिया.
किडनी ट्रांसप्लांट के बाद उन्होंने तैराकी को एक बार फिर अपनाया और राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कई गोल्ड और सिल्वर मेडल जीते. 200 से अधिक बच्चों को तैराकी सिखाई महानंदा एरिना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में कोचिंग दी, और इन उपलब्धियो पर उस वक्त मोहर लगी जब भारत सरकार का प्रतिष्ठित अटल अवार्ड भी अविनाश को प्राप्त हुआ.

‘मन की बात’ तक पहुंची कहानी
अविनाश ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आभार जताया और अपनी पूरी संघर्ष गाथा साझा की. यही कहानी अब ‘मन की बात’ तक पहुंची और आज भी उज्जैन के निवासी इस युवा के संघर्ष की दास्तान देश सुनने जा रहा है.

सिंहस्थ में निभाना चाहते हैं जिम्मेदारी
अविनाश अब सिर्फ खिलाड़ी नहीं, बल्कि समाजसेवा की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहते हैं. उनकी इच्छा है कि महाकाल की नगरी मैं जो 40 करोड़ श्रद्धालु कुंभ के दौरान आएंगे, ऐसे शिप्रा नदी में स्नान करेंगे, डूबते श्रद्धालुओं को बचाने के लिए ट्रेनिंग दें, सिंहस्थ 2028 में सुरक्षा व्यवस्था में योगदान दें. मध्यप्रदेश के युवाओं को तैराकी में आगे बढ़ाएं. उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलने की भी इच्छा जताई है.

शहर में सम्मान, समाज में गर्व
अविनाश की इस उपलब्धि पर शहर में खुशी की लहर है. महापौर मुकेश टटवाल, पूर्व महापौर मदनलाल ललावत, बैरवा समाज के प्रदेश अध्यक्ष राजेश जारवाल, शहर अध्यक्ष सुरेन्द्र मरमट सहित समाज के कई संगठनों ने उनका सम्मान किया. बैरवा समाज और प्रशासन ने भी इस उपलब्धि को गौरव का क्षण बताया.

अपील हुई, सुनिए ‘मन की बात’
समाजजनों ने शहरवासियों से अपील की गई है कि प्रधानमंत्री का ‘मन की बात’ कार्यक्रम अधिक से अधिक संख्या में सुनें और अविनाश जैसे जज्बे से प्रेरणा लें.

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