भगवान तक पहुंचने के लिए विनम्रता व सच्ची श्रद्धा आवश्यक 

चितरंगी । ग्राम फुलकेश में गुरु परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन दशम स्कंध का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा व्यास अरुण कृष्ण शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि मनुष्य के भीतर काम, क्रोध, लोभ, मोह और अज्ञान ही सबसे बड़ा आवरण है, जो उसे भगवान से दूर करता है। भगवान श्रीकृष्ण जब इस अज्ञान रूपी पर्दे को हटाते हैं, तब जीवात्मा उनके चरणों में स्थित हो जाती है और इसी दिव्य प्रक्रिया को रासलीला के रूप में समझाया गया है। महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि आज का मानव बाहरी आडंबर में उलझा हुआ है, जबकि वास्तविक भक्ति भीतर की शुद्धता में निहित है। उन्होंने बताया कि भगवान तक पहुंचने के लिए सरलता, विनम्रता और सच्ची श्रद्धा आवश्यक है। एकादशी व्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जैसे गंगा जल सबसे पवित्र माना जाता है, उसी प्रकार एकादशी व्रत आत्मा की शुद्धि का सर्वोत्तम माध्यम है। उद्धव चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि केवल ज्ञान प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसमें प्रेम, दया, करुणा और वात्सल्य का समावेश होना चाहिए, अन्यथा मनुष्य संवेदनहीन बन जाता है। भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह की झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर लड्डू कृष्ण शास्त्री, विजय मिश्रा, सूरज मिश्रा, यजमान सुखेंद्र धर, शीतलाधर, रावेन्द्र धर, प्रवेंद्र धर, संदीप, हिमांशु, सचिन, सिंपल सहित हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।

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