नई दिल्ली | भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि एंथ्रोपिक द्वारा विकसित ‘Mythos AI’ मॉडल सुरक्षा के लिए ‘अभूतपूर्व’ खतरा बन सकता है। एआई का यह नया स्वरूप इतना शक्तिशाली है कि यह दशकों पुरानी सुरक्षा खामियों को खुद खोजकर साइबर हमले करने में सक्षम है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि भविष्य की चुनौतियां ‘हथियारों’ से नहीं बल्कि ‘कोड’ से होंगी, इसलिए भारतीय बैंकों को अपने डिजिटल ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करने की तत्काल आवश्यकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ‘Mythos AI’ (कोडनेम: कैप्यबारा) में सॉफ्टवेयर प्रणालियों की उन सूक्ष्म कमियों को पहचानने की क्षमता है जिन्हें मानवीय आंखें नहीं देख पातीं। यदि यह तकनीक गलत हाथों में पड़ती है, तो बैंकों के सुरक्षित सर्वर में सेंध लगाना और बड़े पैमाने पर वित्तीय डेटा की चोरी करना आसान हो जाएगा। सरकार ने भारतीय बैंक संघ (IBA) और CERT-In जैसी सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे रीयल-टाइम अलर्ट सिस्टम और एक मजबूत साझा सुरक्षा कवच तैयार करें ताकि किसी भी संभावित हमले को शुरुआत में ही विफल किया जा सके।
आईटी मंत्रालय (MeitY) इस वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा कर रहा है। वित्त मंत्री ने भरोसा दिलाया कि यद्यपि भारत का बैंकिंग ढांचा और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत है, फिर भी डिजिटल कानूनों और सुरक्षा नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। सरकार का मुख्य ध्यान एआई-आधारित हमलों को रोकने के लिए नियमों को अपडेट करने और बैंकों के बीच सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर है। सतर्कता और नवाचार ही अब वित्तीय साइबर अपराधों के खिलाफ सबसे बड़ा रक्षात्मक हथियार साबित होंगे।

