काठमांडू | नेपाल के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संसद के दोनों सदनों (प्रतिनिधि सभा और राष्ट्रीय सभा) का सत्र बिना बुलाए ही स्थगित कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रपति ने मंत्रिमंडल की सिफारिश पर 21 अप्रैल को ही आगामी 30 अप्रैल के लिए सत्र आहूत किया था। राष्ट्रपति कार्यालय ने इस अचानक स्थगन के पीछे ‘विशेष कारणों’ का हवाला दिया है, लेकिन कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। विपक्षी नेताओं, विशेषकर नेपाली कांग्रेस के अर्जुन नरसिंह के.सी. ने सरकार के इस कदम को लोकतांत्रिक इतिहास में ‘अभूतपूर्व और हतप्रभ’ करने वाला निर्णय करार दिया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की सरकार वित्तीय अनियमितताओं और विवादों से घिरी हुई है। हाल ही में गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने एक व्यवसायी के साथ संदिग्ध व्यापारिक संबंधों और शेयरों के लेन-देन के आरोपों के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले प्रधानमंत्री ने श्रम मंत्री दीप कुमार साह को बर्खास्त कर दिया था। सत्ताधारी ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ (RSP) और प्रधानमंत्री शाह, जो पिछले साल के ‘जेन-जेड’ विरोध प्रदर्शनों के बाद पारंपरिक पार्टियों को हराकर सत्ता में आए थे, अब सुशासन और पारदर्शिता के अपने दावों पर ही सवालों के घेरे में हैं।
नेपाल की आंतरिक राजनीति में मची इस उथल-पुथल के बीच भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (SSB) की संयुक्त टीम ने संदिग्ध परिस्थितियों में 85 लाख रुपये से अधिक मूल्य की भारतीय और नेपाली मुद्रा जब्त की है। इस मामले में छह लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनके पास से 16.5 लाख रुपये भारतीय और 69 लाख रुपये नेपाली करंसी मिली है। एक ओर काठमांडू में सत्ता के गलियारों में अस्थिरता का माहौल है, वहीं दूसरी ओर सीमावर्ती इलाकों में इतनी बड़ी नकदी का मिलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

