बेरूत/यरूशलम, 23 अप्रैल (वार्ता) पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच दशकों बाद पहली बार इज़रायल और लेबनान के राजदूतों के गुरुवार को अमेरिका के वाशिंगटन में सीधे मिलने की उम्मीद है। ईरान युद्ध और हिजबुल्ला के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई के बीच हो रही यह दूसरे दौर की बातचीत काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्ष 1993 के बाद यह पहला मौका है जब दोनों देश सीधी बातचीत की मेज पर होंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ जारी इज़रायली सैन्य कार्रवाई और दोनों देशों के बीच के मतभेदों को सुलझाना है। 2025 में सत्ता में आई लेबनान की नई सरकार इस समय दोहरी मुसीबत में है- उसे एक तरफ इज़रायली हमले झेलने पड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ हिजबुल्ला और उसके पीछे खड़े ईरान का आंतरिक खतरा बना हुआ है।
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने साफ किया है कि इस बातचीत का मकसद दुश्मनी को खत्म करना, दक्षिणी इलाकों से इज़रायली कब्जे को हटाना और अंतरराष्ट्रीय सीमा तक लेबनानी सेना की तैनाती करना है। उन्होंने कहा, “हम अब किसी के शतरंज के मोहरे नहीं बनेंगे और न ही किसी और की जंग के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल होने देंगे।” इधर इज़रायल का रुख कड़ा बना हुआ है। इज़रायली रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ ने बार-बार कहा है कि उनका लक्ष्य हिजबुल्ला के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट करना है। इज़रायली प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि शांति की राह में हिजबुल्ला ही सबसे बड़ी बाधा है, जिसे हटाना जरूरी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इसी महीने लेबनान में संघर्ष विराम के लिए प्रयास तेज कर दिए थे। 14 अप्रैल को हुई पहले दौर की बातचीत के बाद श्री ट्रंप ने हिजबुल्ला और इज़रायल के बीच 10 दिनों के युद्धविराम की घोषणा की थी।

