वॉशिंगटन | होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नौसेना की सख्त नाकाबंदी के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान गंभीर आर्थिक कंगाली के कगार पर पहुंच गया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान “नकदी के लिए तरस रहा है” और उसे हर दिन लगभग 500 मिलियन डॉलर का भारी नुकसान हो रहा है। ट्रंप के अनुसार, ईरान की सैन्य और पुलिस इकाईयों को वेतन तक नहीं मिल पा रहा है, जिससे आंतरिक असंतोष बढ़ रहा है। अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर रखी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा हैंडल करने वाला यह जलमार्ग वर्तमान में वैश्विक तनाव का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की अपील पर ईरान के साथ युद्धविराम को आगे बढ़ाने का निर्णय तो लिया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि नौसेना की नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक ईरान एक ठोस प्रस्ताव के साथ बातचीत की मेज पर नहीं आता। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि शांति वार्ता फिलहाल रुकी हुई है क्योंकि दोनों पक्ष परमाणु कार्यक्रम और तेल निर्यात जैसे बुनियादी मुद्दों पर एक-दूसरे से काफी दूर हैं। अमेरिका का कहना है कि वह बातचीत को तब तक लंबा नहीं खींचेंगे जब तक कोई सकारात्मक प्रगति नहीं दिखती। इस कूटनीतिक रस्साकशी ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है।
तनाव के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए बुधवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में दो विदेशी जहाजों को जब्त करने का दावा किया है। ईरान ने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और व्यवस्था में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप उसकी ‘रेड लाइन’ है। इससे पहले ओमान के तट पर एक जहाज पर हमले और गोलीबारी की खबरें भी सामने आई थीं। ईरान ने अमेरिकी मांगों को अत्यधिक बताते हुए उनका कड़ा विरोध किया है। फिलहाल, समुद्र में जारी इस सैन्य और आर्थिक घेराबंदी ने पूरे मध्य पूर्व को युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

