राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नौसेना सचिव जॉन फेलन को अचानक पद से हटा दिया है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी सैन्य नेतृत्व में हो रहे इन बड़े बदलावों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिका इस समय मिडिल ईस्ट में लंबे सैन्य तनाव में उलझा हुआ है, और इसी बीच वहां की सत्ता और सेना के भीतर हो रहे लगातार बदलाव कई सवाल खड़े कर रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य ताकत को काफी हद तक कमजोर कर दिया है, लेकिन हालिया घटनाएं इस दावे के उल्ट एक अलग तस्वीर पेश कर रही हैं।
दरअसल, ट्रंप प्रशासन के भीतर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया गया है। अमेरिकी नौसेना सचिव जॉन फेलन को अचानक उनके पद से हटा दिया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने 22 अप्रैल को घोषणा करते हुए कहा कि फेलन ‘तुरंत प्रभाव से’ अपना पद छोड़ रहे हैं। हालांकि, इस फैसले के पीछे की कोई स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं।
पहले आर्मी चीफ को किया गया था बाहर
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले इसी महीने अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी रैंडी जॉर्ज और दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी पद से हटाया जा चुका है। लगातार हो रहे ये बदलाव ऐसे समय पर सामने आ रहे हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और स्थिति अब भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं मानी जा रही।
पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि जॉन फेलन अब सरकार का हिस्सा नहीं रहेंगे। उनकी जगह अस्थायी तौर पर हंग काओ को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अब तक कई अधिकारियों को हटाया गया
ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद से सैन्य नेतृत्व में बड़े पैमाने पर बदलाव देखे गए हैं। इनमें जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के पूर्व अध्यक्ष चार्ल्स क्यू. ब्राउन को फरवरी 2025 में हटाया जाना भी शामिल है। इसके अलावा कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी जैसे नौसेना और कोस्ट गार्ड के प्रमुख, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी से जुड़े अधिकारी और वायुसेना के शीर्ष पदों पर बैठे लोग भी बदले गए हैं।
मनपसंद ने सैन्य नेतृत्व चुन रहे ट्रंप
इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी पसंद के अनुसार नेतृत्व चुन रहे हैं। हालांकि, डेमोक्रेटिक नेताओं ने इस पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि इससे पारंपरिक रूप से निष्पक्ष मानी जाने वाली अमेरिकी सेना के राजनीतिक प्रभाव में आने का खतरा बढ़ सकता है।
