उज्जैन में 30 हजार करोड़ के काम जारी, हाउसिंग बोर्ड के हाथ खाली

उज्जैन: सिंहस्थ 2028 को लेकर शहर में जहां करीब 30 हजार करोड़ के विकास कार्य तेज गति से चल रहे हैं, वहीं उज्जैन हाउसिंग बोर्ड पूरी तरह हाशिए पर नजर आ रहा है. हालात ऐसे हैं कि बोर्ड के पास न कोई जमीन बची है, न कोई नई योजना, और न ही सिंहस्थ को लेकर कोई ठोस विजन दिखाई दे रहा है.
करीब 35 से 40 अधिकारी-कर्मचारी होने के बावजूद विभाग में जनहित से जुड़ा कोई बड़ा काम नहीं हो रहा. ऐसे में ‘आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया’ जैसी स्थिति बन गई है, जहां बिना काम के सरकारी वेतन जारी है और नतीजा शून्य नजर आ रहा है.

योजनाओं का सूखा, जिम्मेदारियों का बोझ
हाउसिंग बोर्ड के जिम्मे उज्जैन, देवास और शाजापुर के साथ-साथ उपायुक्त कार्यालय होने के कारण रतलाम, मंदसौर और नीमच तक का दायरा आता है. बावजूद इसके कोई नई आवासीय या व्यावसायिक योजना धरातल पर नहीं उतर रही. पहले जहां बोर्ड आम जनता को कम कीमत पर मकान और दुकान उपलब्ध कराता था, वहीं अब यह व्यवस्था लगभग खत्म होती नजर आ रही है.

70 करोड़ के बंगले, लेकिन फायदा नहीं
राजस्व कॉलोनी में करीब 70 करोड़ की लागत से अधिकारियों-कर्मचारियों के बंगले बनाए जा रहे हैं, इसमें भी बोर्ड को सीधा आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा. ठेकेदार को भुगतान के बदले जमीन दी जा रही है, जिससे हाउसिंग बोर्ड केवल मध्यस्थ बनकर रह गया है और उसे महज 6′ का लाभ मिल रहा है.

अधिकारियों के पास न टीम, न प्लान
वर्तमान में कार्यपालन यंत्री निर्मल गुप्ता से लेकर उपायुक्त प्रबोध पराते समेत अन्य अधिकारियों के पास न पर्याप्त टीम है, न कोई ठोस योजना. हाल ही में पदस्थ हुए उपायुक्त पराते भी रिटायरमेंट के करीब हैं, जिससे दीर्घकालिक योजना बनना और भी मुश्किल नजर आ रहा है.

ऑनलाइन सिस्टम पर भी सवाल
पुरानी योजनाओं के दस्तावेज ऑनलाइन करने की पहल भी सफल नहीं हो पाई. हितग्राहियों के दस्तावेज बार-बार रिजेक्ट होने और भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी की शिकायतें सामने आने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

दूसरे विभागों के पास काम की भरमार
नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, विकास प्राधिकरण, पुलिस हाउसिंग, स्मार्ट सिटी, सेतु निगम और एमपीआरडीसी जैसे विभागों को सिंहस्थ के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट सौंपे गए हैं, जहां काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसके विपरीत हाउसिंग बोर्ड के हाथ लगभग खाली हैं.

मुलाकातें हुईं, लेकिन नतीजा शून्य
नवभारत को मिली जानकारी के अनुसार हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी कलेक्टर, संभाग आयुक्त और सिंहस्थ मेला प्रशासन से मुलाकात कर अपनी स्थिति बता चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जिम्मेदारी या प्रोजेक्ट बोर्ड को नहीं सौंपा गया.

चर्चे हुए आम
शहर में चर्चा है कि जिस विभाग का मूल काम आवास और व्यवसायिक योजनाएं बनाना था, वही आज निष्कि्रय हो गया है. ऐसे में जरूरत है कि सिंहस्थ 2028 के कार्यों में हाउसिंग बोर्ड को भी शामिल किया जाए, ताकि एक ओर विभाग सक्रिय हो और दूसरी ओर आम जनता को राहत मिल सके.
कुल मिलाकर जब पूरा शहर विकास की रफ्तार पकड़ चुका है, तब हाउसिंग बोर्ड का खाली बैठना न सिर्फ विभाग के सिस्टम पर सवाल खड़े करता है, बल्कि जनहित के अवसर भी खोता नजर आता है.

मैं तो अभी आया हूं
उज्जैन में पहले पदस्थ रहा हूं. अभी वापस सरकार ने तबादला करके उज्जैन हाउसिंग बोर्ड भेजा है, उपायुक्त के पद पर पदभार ग्रहण कर लिया है. कलेक्टर सर से लेकर कमिश्नर सर से मिले हैं आगे की योजनाएं बनाई जा रही है.
– प्रबोध पराते, हाउसिंग बोर्ड , उपायुक्त उज्जैन

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