चेन्नई (वार्ता) मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में रिलीज सुपरस्टार रजनीकांत अभिनीत फिल्म ‘कुली’ को ए प्रमाणपत्र जारी करने के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए फिल्म निर्माता सन टीवी नेटवर्क की उस याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया जिसमें फिल्म में अत्यधिक हिंसा का हवाला देते हुए इसे चुनौती दी गयी थी।
न्यायमूर्ति टीवी तमिलसेल्वी ने सीबीएफसी की जांच समिति और संशोधन समिति के फैसले पर पुनर्विचार करने से इनकार करते हुए कलानिधि मारन के स्वामित्व वाली प्रोडक्शन हाउस की याचिका खारिज कर दी।
कुली के लिए ए प्रमाणपत्र जारी करने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए सीबीएफसी ने दलील दी कि यह 1991 में केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशानिर्देशों पर आधारित था, जिसमें सीबीएफसी को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि फिल्में सिनेमाई मानकों का पालन करें। सीबीएफसी ने कहा कि ‘कुली’ के बारे में फिल्म की दिशानिर्देशों के अनुसार जांच में पाया गया कि उसे केवल ए
प्रमाणन दिया गया है। पांच सदस्यीय जांच समिति और 10 सदस्यीय पुनरीक्षण समिति दोनों इस पर एकमत थी।
सीबीएफसी ने आगे कहा कि पुनरीक्षण समिति ने फिल्म निर्माताओं के साथ मौखिक सुनवाई के दौरान सुझाव दिया था कि यदि वे यू/ए प्रमाणन चाहते हैं तो कुछ दृश्यों को संपादित करें।
गत 14 अगस्त को देश भर के सिनेमाघरों में रिलीज फिल्म ‘कुली’को ए प्रमाणपत्र मिलने के कारण 18 साल से कम उम्र के लोग इसे सिनेमाघरों में नहीं देख सकते। इसलिए प्रोडक्शन कंपनी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और दलील दी कि ए प्रमाणपत्र इस आधार पर जारी किया गया था कि यह बच्चों के देखने के लिए अनुपयुक्त है , क्योंकि इसमें हिंसक सामग्री और धूम्रपान एवं शराब के सेवन को लगातार दिखाया गया है।
दिलचस्प तथ्य यह भी है कि 36 साल के अंतराल के बाद ए प्रमाणपत्र पाने वाली यह रजनीकांत की पहली फिल्म है।
