नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने इस साल की शुरुआत में कोलकाता में आई-पैक के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित हस्तक्षेप पर कड़ी आपत्ति जताई है। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें ईडी ने सुश्री बनर्जी और राज्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के समक्ष प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। एजेंसी का आरोप है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक सलाहकार आई-पैक पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री और पुलिस ने बाधा डाली थी। इसके साथ ही, ईडी अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी को भी चुनौती दी है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है। पीठ ने कहा, “किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री जांच के बीच में इस तरह नहीं आ सकता। यह लोकतंत्र को खतरे में डालने जैसा है। यह एक व्यक्ति द्वारा किया गया कृत्य है जो मुख्यमंत्री के पद पर है और इस तरह लोकतंत्र को संकट में डालना उचित नहीं है।” एजेंसी के अनुसार, जब तलाशी चल रही थी तब सुश्री बनर्जी 100 से अधिक पुलिसकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आई-पैक कार्यालय और इसके संस्थापक प्रतीक जैन के आवास में दाखिल हुई थीं। उन्होंने इस दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और चुनावी डेटा वाले दस्तावेजों सहित कई महत्वपूर्ण साक्ष्य अनधिकृत रूप से हटा दिए। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने याचिका के स्वीकार किये जाने का विरोध किया है। राज्य का तर्क है कि किसी केंद्रीय सरकारी विभाग को राज्य सरकार के खिलाफ रिट याचिका दायर करने की अनुमति देना ‘संघीय ढांचे के लिए खतरनाक’ होगा।

