
छतरपुर। जिले में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने बड़ा फैसला लिया है। म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा (3) के तहत जिले के सभी विकासखंडों और नगरीय क्षेत्रों को तत्काल प्रभाव से 15 जुलाई 2026 तक जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है।
इस आदेश के लागू होते ही पेयजल स्रोतों के उपयोग पर सख्ती बढ़ा दी गई है। बिना अनुमति कोई भी व्यक्ति हैंडपंप, ट्यूबवेल या अन्य पेयजल स्रोत का उपयोग सिंचाई या व्यावसायिक कार्यों के लिए नहीं कर सकेगा। साथ ही 150 मीटर की परिधि में नए हैंडपंप या ट्यूबवेल का खनन प्रतिबंधित रहेगा।
शासकीय विभागों द्वारा किए जाने वाले नलकूप खनन को छोड़कर अन्य सभी प्रकार के नलकूपों के खनन पर रोक लगा दी गई है। विशेष परिस्थितियों में केवल अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की लिखित अनुमति से ही खनन की अनुमति दी जाएगी। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह कदम आमजन को गर्मी के दौरान पेयजल की सुचारु आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया है।
