छतरपुर। जिला मुख्यालय में इन दिनों रसोई गैस (LPG) के लिए उपभोक्ताओं को भीषण किल्लत और भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। गैस सिलेंडर पाने की जद्दोजहद इस कदर बढ़ गई है कि लोग अपनी बारी के इंतजार में गैस गोदामों के बाहर ही रातें गुजारने को मजबूर हैं। पन्ना रोड और रेलवे स्टेशन के पास स्थित स्वरूप गैस एजेंसी पर कड़ाके की ओस और असुरक्षित हाईवे किनारे उपभोक्ताओं का डेरा देखा जा रहा है।
छतरपुर जिले में गैस वितरण की लचर व्यवस्था ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है। हालात यह हैं कि ऑनलाइन बुकिंग के बावजूद सिलेंडर मिलने की कोई गारंटी नहीं दिख रही। स्वरूप गैस एजेंसी के बाहर कतार में लगे उपभोक्ता जमना प्रसाद पटेल ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि वे रात को खाना खाकर ही गोदाम के सामने पहुँच गए थे। उन्होंने पूरी रात खुले आसमान के नीचे इस उम्मीद में बिताई कि सुबह सबसे पहले उन्हें गैस मिल सकेगी।
सुबह 4 से 5 बजे के बीच तो कतार इतनी लंबी हो जाती है कि वह हाईवे के मुख्य मार्ग तक पहुँच जाती है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि रात भर जागने और सुबह लाइन में खड़े रहने के बावजूद एजेंसी प्रबंधन और गोदाम के कर्मचारी समय पर नहीं पहुँचते। सुबह 10 बजे तक भी कार्यालय न खुलने से लोगों का धैर्य जवाब दे रहा है। काम-धंधा छोड़कर गैस के लिए घंटों बर्बाद करना अब मध्यमवर्गीय परिवारों की नियति बन गई है।
प्रशासन की चुप्पी
शहर के मुख्य गैस वितरण केंद्रों पर मची इस अफरा-तफरी के बीच जिला प्रशासन और खाद्य विभाग की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। उपभोक्ताओं की मांग है कि वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाया जाए ताकि बुजुर्गों और कामकाजी लोगों को इस तरह रात भर सड़कों पर न भटकना पड़े।
