विन्ध्य की डायरी
डॉ रवि तिवारी
चाल-चरित्र और चेहरा की आकर्षक और लोकलुभावन रणनीति पर अमल कर सत्ता तक का सफर तय करने वाली प्रदेश और केंद्र की डबल इंजन सरकार वाली भारतीय जनता पार्टी की विंध्य में कलई खुलने लगी है. मंडल से लेकर जिला तक जहां संगठन में खींचतान चल रही, वही विधायकों का सरकार के प्रति असन्तोष अब सार्वजनिक तौर पर फूटने लग है. अपने को सर्वस्पर्शी बनाकर पार्टी ने अपनी रीति-नीति को न जाने कहाँ और कब के लिए सुरक्षित रख दिया है. यह बात राजनैतिक समीक्षकों के समझ से परे है. विपक्ष विहीन लोकतांत्रिक व्यवस्था की मानिद इस दल ने न सिर्फ राजनैतिक दलों को हासिए में धकेल दिया है, बल्कि विंध्य में दर्जनों ऐसे नेताओं की राजनैतिक पहचान को समाप्त कर दिया है.
जिनसे उनके क्षेत्र की जनता उम्मीद लगाए बैठी थी. विंध्य के ज्यादातर नेता अपने राजनैतिक जीवन के अंतिम दौर में है, इसके बात भी उनके विकल्प के रूप में कही कोई बड़ा और नया चेहरा नजर नहीं आ रहा. शुरू से स्वयं नेता पैदा करने का दावा करने वाली भाजपा के बड़े नेता इस मामले में क्या सोच रहे हैं. समझ नहीं आ रहा पर सरकार के प्रति निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की नाराजगी यह तो संकेत दे रही है कि संगठन की सोच उनकी सोच से भविष्य को लेकर भिन्न है. हमेशा संगठन के दबाव में रहने वाले नेता अब उतना सम्मान सार्वजनिक तौर पर भी नही करते. अब तक पर्दे के पीछे होने वाली नोकझोंक खुलकर होने के बावजूद चिरनिद्रा में सोए विपक्ष को हिला-डुला नही पा रही है. निस्तेज हो रही विन्ध्य की राजनीतिक चेतना के लिए कौन भागीरथ बनेगा समझ नही आ रहा.
विंध्य में कांग्रेस ने साधी चुप्पी
विधानसभा और लोकसभा में पराजय का मुंह देखने के बाद भी कांगेे्रस में किसी तरह का बदलाव देखने को नही मिल रहा है. जनता से जुड़े मुद्दो को लेकर कभी कांगेे्रस विंध्य में मुखर होती थी पर अब पहले जैसी बात नही रही और न ही जमीन से जुड़े नेता रहे. अपनी ढपली अपना राग अलाप रहे नेता भी चुप्पी साधे बैठे है. छत्रपो की राजनीत में पूरी पार्टी सिमट कर रह गई है. अभी हाल ही में संगठन को मजबूत करने के साथ बूथ स्तर पर कांग्रेस को खड़ा करने का पाठ रीवा में प्रदेश के सह प्रभारी रणविजय सिंह ने बढ़ाया था. साथ ही सुझाव और समस्याएं भी सुनी थी. महीना भर होने को आया पर कोई परिवर्तन देखने को नही मिला. वक्त के इंतजार में कांग्रेसी चुप्पी साधे समूचे विंध्य में बैठे हुए है. चुनावी सभा में केवल दावेदारी के लिये उतरा आते है. हर विधानसभा में कांग्रेसियों का मेला लगता है पर जब मैदानी स्तर पर पसीना बहाने की बात होती है तो गायब रहते है.
सीएम ने की प्रशासन-पुलिस की तारीफ
प्रयागराज महाकुंभ गंगा स्नान के लिये रीवा से होकर लाखो कुंभ तीर्थ यात्री निकले. प्रयागराज में अत्यधिक भीड़ होने के कारण रीवा की सीमा पर श्रद्धालुओ के वाहन थम गए, प्रशासन-पुलिस ने समुचित व्यवस्था की. कमिश्नर, आईजी दलबल के साथ मौके पर ड़टे रहे. विंध्य के लोगो ने अपनी उदारता और मानवता का परिचय देते हुए तीर्थ यात्रियो के सेवा में अपने-अपने स्तर पर ड़टे है. व्यवस्था को लेकर प्रदेश के मुखिया डा0 मोहन यादव ने ट्वीट कर जिला प्रशासन-पुलिस की तारीफ की. उन्होंने कहा कि प्रयागराज में अत्यधिक भीड़ होने के कारण रीवा जिले में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के वाहन मध्यप्रदेश की सीमा पर रूके रहे. हमारे प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों ने मौके पर मौजूद रहकर सभी श्रद्धालुओं के खाने एवं पानी से लेकर ठहरने तक की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराई. मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश की सीमा पर रीवा प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पुख्ता इंतजाम किये गये.
