नयी दिल्ली 21 अप्रैल (वार्ता) तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में गुरुवार को होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान मंगलवार शाम पांच बजे थम गया।
तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होगा।
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पहले जनसभाएं रोक दी जाती है। प्रचार थमने के बाद उम्मीदवार और उनके कार्यकर्ता मतदाताओं से घर-घर जाकर संपर्क साधते हैं।
दोनों राज्यों में 23 अप्रैल को मतदान सुबह सात बजे शुरू होगा। पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का चुनाव 29 अप्रैल को होगा, जिसमें 142 सीटों पर मतदान कराया जायेगा।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु में कुल 4,023 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे हैं। वहां मुख्य मुकाबला सत्तारूढ द्रविड़ मनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले गठबंधन और उसके मुख्य प्रतिद्वंदी अन्नाद्रमुक-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के बीच है। इस बार अभिनय की दुनिया से राजनीति के अखाड़े में उतरे अभिनेता सी जोसफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कज़गम ने कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। एक महीने से अधिक समय से राज्य में चुनावी सरगर्मियां चरम पर हैं।
सत्तारूढ द्रमुक की ओर से मुख्यमंत्री एम के स्टालिन स्टार प्रचारक हैं। कांग्रेस समेत द्रमुक के सभी सहयोगी दलों के नेताओं ने भी राज्य में कई रैलियां की हैं। सत्तारूढ गठबंधन को बेदखल करने के लिए अन्नाद्रमक प्रमुख एडापट्टी के पलानीस्वामी अभियान की बागडोर संभाले हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन और अन्य नेताओं ने भी इस गठबंधन के चुनावी अभियान को धार दी है। वहां प्रचार अभियान में जहां विपक्षी गठबंधन ने सत्ता पक्ष के विरुद्ध सरकार में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे को उछाला है। वहीं द्रमुक और उसके सहयोगी दल तमिल स्वाभिमान और राज्य के अधिकार पर अतिक्रमण के मुद्दे को हवा दे रहे हैं। प्रचार के आखरी दौर में महिला आरक्षण भी मुद्दा बन गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में इस चुनाव में 5.67 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं, जिनमें 2.77 करोड़ पुरुष, 2.89 करोड़ महिला और 7617 उभयलिंगी शामिल हैं। मतदाताओं के लिए 75,032 मतदान केंद्र निर्धारित हैं। मतदान में भागदारी को प्रोत्साहित करने के लिए चुनाव आयोग ने राज्य भर में मतदाता व्यापक जागरूकता अभियान चलाया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 23 अप्रैल को 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान होगा। राज्य में चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए आयोग ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किये हैं और संवेदनशील इलाकों में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल की सघन तैनाती की गयी है। इनमें उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन व जंगलमहल अंचल के पांच जिले शामिल हैं। पहले चरण में मुर्शिदाबाद की 22, कूचबिहार की नौ, जलपाईगुड़ी की सात, अलीपुरद्वार की पांच, कलिंपोंग की एक, दार्जिलिंग की पांच, उत्तर दिनाजपुर की नौ, दक्षिण दिनाजपुर की छह, मालदा की 12, बीरभूम की 11, पश्चिम बर्द्धमान की नौ, पूर्व मेदिनीपुर की 16, पश्चिम मेदिनीपुर की 15, झाड़ग्राम की चार, पुरुलिया की नौ व बांकुड़ा की 12 सीटें शामिल हैं।
पहले चरण में कुल 1,478 प्रत्याशी मैदान में हैं। इस चरण में मतदाताओं की कुल संख्या 3.60 करोड से अधिक है, जिनमें 1.84 करोड पुरुष, 1.74 करोड़ महिलाएं और 465 उभयलिंगी शामिल हैं। पश्चिम बंगाल में कुल 6.44 करोड़ मतदाता हैं।
राज्य में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच है। तृणमूल कांग्रेस के चुनाव प्रचार का दारोमदार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कंधों पर है। भाजपा के लिए प्रधानमंत्री मोदी, केन्द्रीय मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान और पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने धुआंधार प्रचार किया है। कांग्रेस और वामपंथी दलों के नेताओं ने भी अपने उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार किया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी चुनाव सभाओं को संबोधित किया।
