इंदौर: संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका. इससे साफ हो गया है कि देश अब विभाजनकारी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा. मोदी सरकार ने महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन के माध्यम से सत्ता पर एकाधिकार जमाने की जो साज़िश रची थी, इंडिया गठबंधन (विपक्ष) की एकजुटता ने उसे विफल कर दिया है.यह बात पत्रकारों से प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने कही. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरू से ही महिला सशक्तिकरण की पक्षधर रही है.
राहुल गांधी के नेतृत्व में यह मांग लगातार उठाई जाती रही है कि महिलाओं को उनका अधिकार बिना किसी शर्त और देरी के मिलना चाहिए. लेकिन केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना जैसी प्रक्रियाओं से जोड़कर इसे लागू करने में अनावश्यक बाधाएं खड़ी की हैं. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर देश की महिलाओं के साथ एक सुनियोजित राजनीतिक छल करने का प्रयास किया गया है, जिसे विपक्ष की एकजुटता ने संसद में विफल कर दिया.संसद में कुल 528 मतों में से विधेयक के पक्ष में केवल 298 वोट, जबकि विरोध में 230 मत पड़े, इसके फलस्वरूप यह असंवैधानिक संशोधन गिर गया है. कांग्रेस आज लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संसद में मिली जीत का स्वागत करती है.
ओबीसी महिलाओं की भागीदारी तय हो उन्होंने कहा कि बिना जातिगत जनगणना के परिसीमन कराना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे विशेष रूप से पिछड़े वर्ग की महिलाओं के अधिकार प्रभावित होंगे. कांग्रेस मांग करती है कि सरकार अपनी मंशा साफ करे और वर्तमान 543 लोकसभा सीटों में ही महिलाओं को 33′ आरक्षण निर्धारित करे. आरक्षण प्रक्रिया में ओबीसी महिलाओं की भागीदारी तय होनी चाहिए, जिसे भाजपा लगातार दरकिनार कर रही है. चर्चा में प्रदेश प्रवक्ता अमित चौरसिया, हिमानी सिंह, पार्षद सोनिला मीमरोट, शशि हाड़ा सहित महिला कांग्रेस की पदाधिकारी मौजूद थी
