करोड़ों की बिल्डिंग, फिर भी बदहाल आईसीयू

सीहोर। जिले का प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र—जिला अस्पतालइन दिनों अपनी बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर सुर्खियों में है. हाल ही में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई नई बिल्डिंग से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद थी, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है. आधुनिक सुविधाओं के दावों के बीच मरीजों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़ रहा है, जिससे अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

सबसे चिंताजनक स्थिति अस्पताल के आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) की सामने आई है. नई बिल्डिंग में संचालित इस ढ्ढष्ट में लगे एयर कंडीशनर लंबे समय से खराब पड़े हैं. भीषण गर्मी के बीच जहां गंभीर मरीजों को नियंत्रित तापमान की सख्त जरूरत होती है, वहीं यहां मरीज उमस और गर्मी में तड़पने को मजबूर हैं. परिजनों का कहना है कि हालात इतने खराब हैं कि उन्हें खुद ही पंखे और अन्य इंतजाम करने पड़ रहे हैं. यह स्थिति न केवल अस्पताल की तकनीकी विफलता को दर्शाती है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा के प्रति बरती जा रही गंभीर लापरवाही को भी उजागर करती है.

अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति भी बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है. कई बार मरीजों को घंटों तक डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ता है. गंभीर हालत में भर्ती मरीजों के लिए यह देरी खतरनाक साबित हो सकती है. परिजनों का आरोप है कि स्टाफ से पूछने पर भी डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती, जिससे अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिवारों में असुरक्षा और नाराजगी बढ़ रही है.

अस्पताल की कार्यप्रणाली पर प्रभावशाली लोगों के दखल की भी चर्चा है. सूत्रों के अनुसार, कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नियमों को दरकिनार कर दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. साथ ही नए कर्मचारियों के अवसर भी सीमित होते नजर आ रहे हैं.

मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में अव्यवस्थाएं अब आम हो चुकी हैं. शिकायतों के बावजूद हालात में कोई ठोस सुधार नहीं दिख रहा है. जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं.ऐसे में जरूरत है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर स्थिति को तत्काल संज्ञान में ले, ताकि मरीजों को उपचार नसीब हो सके.

अस्पताल में क्रिटिकल, नर्सिंग होम में नार्मल

महिला वार्ड की स्थिति भी सवालों के घेरे में है. यहां भर्ती गर्भवती महिलाओं को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं. परिजनों का कहना है कि मामूली जटिलताओं को क्रिटिकल कंडीशन बताकर कई महिलाओं को जिला अस्पताल से रेफर कर दिया जाता है. हैरानी की बात यह है कि यही महिलाएं निजी अस्पतालों में पहुंचने के बाद सामान्य प्रसव कर लेती हैं. इससे यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं जिम्मेदारी से बचने के लिए अनावश्यक रेफर की प्रवृत्ति तो नहीं अपनाई जा रही.

अभी आईसीयू को शुरू ही नहीं किया

अस्पताल के नए भवन में फिलहाल आईसीयू चालू ही नहीं किया गया है. हो सकता है. स्टॉफ ने वहां मरीज भर्ती कर दिए हों. मैं वास्तविकता पता करता हूं.

डॉ. आरके वर्मा,
प्रभारी सिविल सर्जन

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