जबलपुर: जबलपुर में गेहूं उपार्जन व्यवस्था में अनियमितताओं और पक्षपात के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। आरोप है कि समितियों के कर्मचारी नियमों को ताक पर रखकर अपने रिश्तेदारों और परिचितों को लाभ पहुंचा रहे हैं, जबकि अधिकारी इस पूरे मामले में निष्क्रिय बने हुए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरछा समिति द्वारा शिवम वेयरहाउस में केंद्र स्थापित किया गया, जबकि संबंधित वेयरहाउस संचालक का पिछली खरीदी में सहयोग नहीं रहा था। बावजूद इसके, रिश्तेदारी के चलते दबाव बनाकर केंद्र स्वीकृत कर दिया गया। इसी तरह शहपुरा क्षेत्र में काकुल वेयरहाउस को प्राथमिकता सूची से हटकर केंद्र बनाया गया, जबकि उसकी क्षमता निर्धारित मानकों से काफी कम है।
पर्याप्त क्षमता वाले गोदाम पड़े खाली
जिले के कई क्षेत्रों में पर्याप्त क्षमता वाले गोदाम खाली पड़े हैं, लेकिन उन्हें केंद्र नहीं बनाया गया। इसके विपरीत, कम क्षमता या दूरस्थ स्थानों पर स्थित वेयरहाउस को प्राथमिकता दी गई है।
हैरानी की बात यह है कि कई ऐसे वेयरहाउस, जहां पहले कई बार खरीदी हो चुकी है, इस बार अनुपयुक्त घोषित कर दिए गए हैं। उदाहरण के तौर पर महादेव वेयरहाउस को इस बार अयोग्य बताया गया, जबकि पूर्व में यहां सफलतापूर्वक खरीदी होती रही है।
25 से 50 किलोमीटर दूर तक बनाए केंद्र
उपार्जन के लिए कुछ मामलों में तो समितियों के केंद्र 25 से 50 किलोमीटर दूर तक स्थापित कर दिए गए हैं, जिससे किसानों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि हर स्तर पर मनमानी देखने को मिल रही है। योग्य और निकट में स्थित गोदामों को नजरअंदाज कर निजी हितों के आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। इससे न केवल व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि किसानों की सुविधा और शासन की नीतियों पर भी असर पड़ रहा है।
