
जबलपुर। मास्टर प्लान के ड्राफ्ट का प्रशासन नहीं किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि नगर तथा ग्राम निवेश डायरेक्टर द्वारा मास्टर प्लान ड्राफ्ट 31 जनवरी 2026 को भेजा जा चुका है। इसके बावजूद भी अभी तक उसका प्रकाशन नहीं किया गया। हाईकोर्ट जस्टिस एन एल भट्ट की एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए अपने आदेश में कहा है कि आठ सप्ताह में याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण किया जाये।
क्रेदाई बिल्डर एसोसिएशन जबलपुर के दीपक अग्रवाल की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि जबलपुर का मास्टर प्लान 2008 से प्रभावशील जबलपुर का मास्टर प्लान वर्ष 2021 में समाप्त हो चुका है। पांच साल से अधिक का समय गुजर जाने के बावजूद भी अभी तक नया मास्टर प्लान का प्रकाशन नहीं किया गया है।
जबलपुर की नगर निगम सीमा में साल 2014 में 125 ग्राम को आठ सीमा में जोड़ा गया है। उनके लिए भी कोई मास्टर प्लान नहीं बनाया गया है। जिसके कारण शहर का विकास प्रभावित हो रहा है। मास्टर प्लान के अभाव में बिल्डरों के प्रोजेक्ट स्वीकृत नहीं हो रहे है। इसके अलावा अवैध निर्माण से सरकार को भी लाखों की आर्थिक क्षति हो रही है।
नगर तथा ग्राम निवेश डायरेक्टर द्वारा मास्टर प्लान ड्राफ्ट 31 1 2026 को अधिनियम की धारा 18 के तहत पब्लिकेशन के लिए भेजा गया था। दो माह से अधिक का समय गुजर जाने के बावजूद भी उसका प्रकाशन नही किया गया हे। इस संबंध में अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के बावजूद भी कार्यवाही नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गयी है। सरकार की तरफ से बताया गया कि मामला विचाराधीन है। याचिका का निराकरण करते हुए एकलपीठ ने उक्त आदेश जारी किये। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की।
