चमोली | उत्तराखंड के दुर्गम और सुंदर पहाड़ी रास्तों पर ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0’ का भव्य आगाज हो गया है। बदरीनाथ और केदारनाथ धाम को जोड़ने वाले पुराने पैदल मार्ग पर आयोजित इस 113 किलोमीटर लंबी मैराथन में जम्मू-कश्मीर से लेकर तमिलनाडु तक के करीब 300 धावक हिस्सा ले रहे हैं। शुक्रवार को हेलंग से हरी झंडी दिखाकर धावकों को रवाना किया गया। यह दौड़ न केवल शारीरिक क्षमता की परीक्षा है, बल्कि यह पंच-केदार के तीन प्रमुख धामों—कल्पेश्वर, रुद्रनाथ और तुंगनाथ से होकर गुजरती है। तीन दिनों तक चलने वाली इस चुनौतीपूर्ण रेस का पहला पड़ाव 36 किलोमीटर दूर कलगोट गांव में तय किया गया है।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य सेना और सरकार के सहयोग से पहाड़ के सीमावर्ती गांवों में पर्यटन को नई संजीवनी देना है। मैराथन जिस रूट से गुजर रही है, वहां स्थानीय लोगों को होमस्टे, गाइड और खान-पान के जरिए सीधे तौर पर काम से जोड़ा जा रहा है। 18 से 60 वर्ष की आयु के प्रतिभागी इस साहसिक दौड़ में शामिल हैं, जिनके ठहरने के लिए सेना ने कलगोट और अन्य पड़ावों पर विशेष व्यवस्था की है। इस पहल से पुराने तीर्थ यात्रा मार्गों को पुनर्जीवित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है, ताकि भविष्य में यहाँ साहसिक पर्यटन के नए द्वार खुल सकें।
‘सूर्य देवभूमि चैलेंज’ के इस दूसरे संस्करण को पिछले साल की तुलना में अधिक लंबा और कठिन बनाया गया है। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले धावक को 1 लाख रुपये और दूसरे स्थान पर आने वाले को 50 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। धावकों को ऊबड़-खाबड़ रास्तों, भारी चढ़ाई और बदलते मौसम के मिजाज से जूझते हुए तीसरे दिन उखीमठ तक की दूरी तय करनी होगी। पेशेवर धावकों के साथ-साथ एडवेंचर के शौकीन लोग भी 10 हजार रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस भरकर इस ऐतिहासिक अनुभव का हिस्सा बने हैं। आयोजन को लेकर धावकों और स्थानीय ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

