वॉशिंगटन | अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घोषणा की है कि अमेरिका रूसी या ईरानी तेल की खरीद पर प्रतिबंधों से और छूट देने की किसी भी संभावना को खारिज करता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि रूसी और ईरानी तेल के लिए जारी किए गए ‘जनरल लाइसेंस’ को रिन्यू नहीं किया जाएगा। बेसेंट के अनुसार, 11 मार्च से पहले जो तेल समुद्री मार्गों में था, उसका इस्तेमाल हो चुका है और अब नए आयात पर कड़ाई से रोक लगाई जाएगी। यह फैसला यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच मॉस्को और तेहरान की आर्थिक घेराबंदी को और मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।
बता दें कि 5 मार्च को अमेरिका ने भारत को 30 दिनों के लिए प्रतिबंधों से विशेष छूट दी थी, जिसकी समय सीमा 11 अप्रैल को समाप्त हो गई है। यूरोपीय थिंक टैंक ‘CREA’ की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में भारत रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा है। इस दौरान भारत ने करीब 5.8 अरब यूरो के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया, जिसमें 91 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल का था। छूट खत्म होने के बाद अब भारत के लिए रूस से सस्ता तेल खरीदना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा, जिससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों और आयात बिल पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
इससे पहले अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने भारत को रूसी तेल खरीदने की सलाह दी थी ताकि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में कमी न आए। हालांकि, अब अमेरिका ने अपने रुख में बदलाव करते हुए छूट देने से मना कर दिया है। वित्त मंत्रालय का मानना है कि रूस और ईरान को तेल के जरिए मिलने वाले राजस्व को रोकना रणनीतिक रूप से अनिवार्य है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत और अन्य बड़े तेल आयातक देश इस नए प्रतिबंधात्मक माहौल में अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए किन वैकल्पिक मार्गों और कूटनीतिक रास्तों का चुनाव करते हैं।

