जबलपुर: न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू होने से ठीक पहले वेयरहाउस चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आ रही है। पाटन तहसील में अंतिम समय पर वेयरहाउस के नाम बदलने और नए नाम जोड़ने से प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरछा समिति के केंद्र के लिए पहले एक नए वेयरहाउस का प्रस्ताव पहुंचा हुआ था, जो कि फाइनल ही माना जा रहा था, लेकिन आखिरी समय में 10 अप्रैल को एक नए वेयरहाउस ने प्रस्ताव भेजा और 13 अप्रैल को उस वेयरहाउस को प्राथमिकता सूची में शामिल कर केंद्र बनाने की सिफारिश कर दी गई। गौरतलब है कि संबंधित संचालक पर पहले धान भंडारण में असहयोग के आरोप लगने के बाद भी यह निर्णय लिया गया।
एक अन्य वेयरहाउस को कर दिया ऊपर
सूत्रों के अनुसार इसी तरह पाटन क्षेत्र में एक अन्य वेयरहाउस को भी प्राथमिकता में ऊपर कर दिया गया, जबकि पहले से सहयोग कर रहे और समय पर प्रस्ताव देने वाले संचालकों को सूची में पीछे कर दिया गया है। इससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बार-बार बदलाव, नहीं हो पा रहा अंतिम निर्धारण
नियमों के अनुसार पहले प्राप्त प्रस्तावों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी, साथ ही मुख्य मार्ग से दूरी और पूर्व रिकॉर्ड को भी आधार बनाया जाना था। लेकिन इन मानकों की अनदेखी से प्रशासनिक अधिकारियों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। बार-बार सूची में बदलाव और आपत्तियों के चलते खरीदी केंद्रों का अंतिम निर्धारण अब तक नहीं हो पाया है, जिससे समय पर खरीदी शुरू होने पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
