दांत निकलवाना पड़ा भारी, घंटी वाले डॉक्टर के गलत इलाज से महिला की मौत, पहले भी जा चुका है जेल

अशोकनगर। ​जिले के चंदेरी में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को ठेंगा दिखाकर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे एक झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से एक और परिवार उजड़ गया। दांत निकलवाने गई एक महिला की गलत इंजेक्शन और बिना सूझबूझ के किए गए इलाज के कारण मौत हो गई। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी डॉक्टर की क्लीनिक को सील कर दिया है।

​क्या है पूरा घटनाक्रम?

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंदेरी के पसियापुरा जागेश्वरी मोहल्ला निवासी रेखा बाई (50 वर्ष), पति भगवान दास कोली, अपनी दाढ़ (दांत) निकलवाने के लिए नगर के चर्चित ‘घंटी वाले डॉक्टर’ के पास गई थीं। परिजनों का आरोप है कि झोलाछाप डॉक्टर ने बिना किसी जांच-पड़ताल और बिना यह पूछे कि महिला ने कुछ खाया-पिया है या नहीं, सीधे इंजेक्शन लगा दिया और उसकी दाढ़ निकाल दी।

​इलाज कराकर महिला जैसे ही अपने घर पहुंची, उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और कुछ ही पलों में उसने दम तोड़ दिया। घबराए परिजन आनन-फानन में महिला को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

​परिजनों का आक्रोश: गलत इंजेक्शन बना मौत का कारण

​महिला की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टर ने बिना किसी सूझबूझ के गलत इंजेक्शन लगाया, जिससे महिला की तत्काल मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस से आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

​पुराना अपराधी है ‘झोलाछाप’ डॉक्टर

​यह पहली बार नहीं है जब इस डॉक्टर की वजह से किसी की जान गई हो। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले भी एक मासूम बच्चे की मौत इसके गलत इलाज से हुई थी। उस मामले में भी डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज हुआ था और उसे जेल की सजा काटनी पड़ी थी। जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर से मौत का कारोबार शुरू कर दिया।

​प्रशासन की कार्रवाई

​घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग और पुलिस सक्रिय हुई।

​क्लीनिक सील: स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ‘घंटी डॉक्टर’ की क्लीनिक को सील कर दिया है।

​जांच शुरू: पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि होगी।

​बड़ा सवाल: आखिर एक बार जेल जाने के बाद भी यह झोलाछाप डॉक्टर दोबारा क्लीनिक कैसे खोल पाया? प्रशासन की ढिलाई और लोगों की जागरूकता में कमी का खामियाजा एक मासूम महिला को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।

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