दूषित पानी पीने को मजबूर बस्ती वासी

चितरंगी। चितरंगी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत झोखो में पेयजल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। यहां पिछले एक वर्ष से हैंडपंप खराब पड़ा होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आदिवासी एवं साहू बस्ती के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं और मजबूरी में गोपद नदी का दूषित पानी पीने को विवश हैं।

किसान कांग्रेस पार्टी के जिला पंचायत सदस्य अशोक सिंह पैगाम के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-3, कोलन बस्ती तथा हनुमान मंदिर के पास स्थित हैंडपंप पिछले एक साल से बंद पड़ा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे पीएचई विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि आंगनबाड़ी केंद्र में छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। गर्मी के मौसम में जलस्तर गिरने से समस्या और बढ़ गई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि खराब हैंडपंप को इतने लंबे समय तक बंद छोड़ देना विभागीय लापरवाही को उजागर करता है। करोड़ों रुपये खर्च कर चलाई जा रही हर घर नल-जल योजना की जमीनी हकीकत यहां पूरी तरह विपरीत नजर आ रही है। यहां बताते चले कि जिला पंचायत सदस्य अशोक सिंह पैगाम ने झोखो ग्राम पंचायत का जनसंपर्क कर मौके पर स्थिति का जायजा लिया और इसे बेहद गंभीर बताया। उन्होंने प्रशासन एवं पीएचई विभाग से तत्काल हैंडपंप मरम्मत कर स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।

शिकायत के बाद टूटती है पीएचई अमले की नींद

आलम यह है कि ऊर्जाधानी में कड़ाके की गर्मी पड़ने लगी है। जिले के सैकड़ों हैंडपंप खराब पड़े हुये हैं। कहीं पर राइजर पाइप के अभाव में बंद है, तो कई पर भू-जल स्तर नीचे खिसकने से हैंडपंप पानी के बदले हवा उगल रहे हैं। पिछले सप्ताह चितरंगी विकासखण्ड के कपूरदेई ग्राम पंचायत का मामला उजागर हुआ था। पीएचई अमला ने आनन-फानन में बिगड़े हैंडपंपों को सुधार, लेकिन अभियान चलाकर बिगड़े हैंडपंपों को सुधारने का कार्य पीएचई अमला नही कर रहा है। इसके पीछे विपक्षी दल कांग्रेस, आप नेताओं का यही कहना है कि प्रदेश के पीएचई मंत्री सम्पतिया उईके का सिंगरौली जिले का प्रभार भी है, लेकिन वे कार्यपालन यंत्री पीएचई पर दबाव नही बना पा रही हैं। उसके पीछे एक नही, अनेक कारण हैं। कार्यपालन यंत्री, प्रभारी मंत्री पर भारी है। इसी के चलते जिले के जनता दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

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