वॉशिंगटन/तेहरान, 13 अप्रैल (वार्ता) पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में उच्चस्तरीय वार्ता के निष्कर्षहीन रहने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है। पाकिस्तान, मिस्र तथा तुर्किये के मध्यस्थ बैकचैनल कूटनीति के जरिए मतभेद कम करने में जुटे हैं। एक्सियोस की एक रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि 21 अप्रैल की युद्धविराम समय सीमा से पहले समझौते की संभावना अब भी बनी हुई है। दोनों पक्षों ने संकेत दिया है कि बातचीत पूरी तरह ठप नहीं हुई है और वार्ता के द्वार खुले हैं। रिपोर्ट में कहा गया है ” बातचीत के दरवाजे अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए। दोनों पक्ष अब भी बातचीत कर रहे हैं।”
रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यस्थ देशों के विदेश मंत्रियों ने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित संबंधित पक्षों से लगातार संपर्क बनाए रखा है। मुख्य विवाद अब भी कायम हैं, जहां अमेरिका ईरान से यूरेनियम संवर्धन रोकने और उच्च संवर्धित भंडार छोड़ने की मांग कर रहा है, वहीं ईरान अपनी संपत्तियों को सौंपे जाने और व्यापक प्रतिबंधों में राहत चाहता है। श्री अराघची ने कहा कि बातचीत करने वाले किसी बड़ी सफलता से “बस कुछ ही इंच दूर” थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने अमेरिका पर अपनी मांगें बदलने का आरोप लगाया। यह एक ऐसा दावा है जिसे अमेरिका ने स्वीकार नहीं किया है, हालांकि वे यह मानते हैं कि इस्लामाबाद दौर के दौरान कुछ प्रगति हुई थी।अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में पहली बार दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत हुई, जिसे “कठोर लेकिन उपयोगी” बताया गया है।
इसी बीच, अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर समुद्री नाकेबंदी की तैयारी भी कर रहा है, हालांकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से अंतरराष्ट्रीय आवाजाही प्रभावित न करने की बात कही गयी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वार्ता विफल होने की स्थिति में आगे की कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं।इसमें सैन्य विकल्प भी शामिल हैं। फिलहाल दोनों पक्ष बातचीत जारी रखते हुए अपने-अपने रुख में समायोजन कर रहे हैं। एक ईरानी अधिकारी के अनुसार, इस्लामाबाद वार्ता विफल नहीं रही, बल्कि उसने कूटनीतिक प्रक्रिया की नींव रखी है।

