नयी दिल्ली, 09 जून (वार्ता) दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने सोमवार को भगवान बिरसा मुंडा को आदिवासी अस्मिता, संघर्ष और स्वाभिमान के प्रतीक बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के इस महानायक का त्याग और समर्पण देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान दिवस के अवसर पर आज प्रदेश भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा ने पार्टी कार्यकाल 14 पंत मार्ग में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्री सचदेवा के अलावा पार्टी अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष सी एल मीणा, सह प्रभारी सुरेंद्र कमांडो, मोर्चा के महामंत्री गिरिधारी लाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उनके संघर्षों और बलिदान को याद किया।
श्री सचदेवा ने कहा कि आदिवासी भाई-बहनों के कल्याण और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनका त्याग और समर्पण देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारत के जनजातीय इतिहास के स्वर्णिम अध्याय हैं। वे उस समय के नायक थे जब अंग्रेज़ी हुकूमत की जड़ें गहरी थीं और जनजातीय समाज उपेक्षा, शोषण और अन्याय का सामना कर रहा था।
उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने न केवल अंग्रेज़ों की शोषणकारी नीतियों का विरोध किया, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध भी आवाज़ उठाई। उन्होंने “उलगुलान” (महाविद्रोह) का नेतृत्व कर यह सिद्ध किया कि आदिवासी समाज न दबेगा, न झुकेगा।
उन्होंने कहा कि उन्होंने समाज को एकजुट किया, उन्हें उनकी ज़मीन, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक पहचान के लिए लड़ना सिखाया। एक युवा संत, समाज-सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में बिरसा मुंडा का योगदान अद्वितीय और प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम भगवान बिरसा मुंडा के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएं और उनके सपनों के समाज की ओर मिलकर कदम बढ़ाएं, जहाँ हर वर्ग को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्राप्त हो।
उल्लेखनीय है कि 15 नवंबर 1875 को तत्कालीन बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में एक गरीब किसान परिवार में जन्मे भगवान बिरसा मुंडा की मृत्य महज 15 वर्ष की आयु में नौ जून 1990 को रांची के केंद्रीय कारागार में हैजा की वजह से हो गयी थी।
