
सारनी। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) पाथाखेड़ा क्षेत्र की कोयला खदानों में कार्यरत ठेका मजदूरों ने लंबे समय से चले आ रहे शोषण, अधूरे वेतन भुगतान और वैधानिक सुविधाओं से वंचित किए जाने के विरोध में अब मुखर होकर अपनी आवाज बुलंद की है। अपनी समस्याओं को लेकर मजदूरों ने क्षेत्र के सम्माननीय विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे से मुलाकात कर विस्तृत चर्चा की और ज्ञापन सौंपते हुए त्वरित समाधान की मांग की।
मजदूरों का आरोप है कि हाई पावर कमेटी (एचपीसी) द्वारा निर्धारित लगभग 1365 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी के बावजूद उन्हें पूर्ण भुगतान नहीं मिल रहा है। साथ ही कोल माइंस प्रोविडेंट फंड (सीएमपीएफ), कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और पीएफ जैसी अनिवार्य सुविधाओं से भी उन्हें वंचित रखा जा रहा है, जो श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है।
मामला केवल वेतन तक सीमित नहीं है। खदानों में सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी है, जिससे मजदूरों की जान हर दिन जोखिम में रहती है। वहीं पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं न होने से मजदूरों और उनके परिवारों की स्थिति दयनीय बनी हुई है।मजदूर नेता मनोज पवार ने बताया कि 4 फरवरी 2026 से लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं और 18 दिनों तक शांतिपूर्ण आंदोलन भी किया गया। इसके बाद हुए समझौते में 3 दिनों के भीतर बकाया वेतन भुगतान और 16 मार्च तक सभी मजदूरों को पुनः कार्य पर रखने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक वादे पूरे नहीं हुए। करीब 80 मजदूर आज भी बेरोजगार हैं।मजदूरों ने विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे से हस्तक्षेप कर उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह लड़ाई अब केवल वेतन नहीं, बल्कि अधिकार, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा की लड़ाई बन चुकी है।मजदूरों का नेतृत्व कर रहे मनोज पवार,राजेश भूमरकर, सत्यवान मंडल, धर्मेन्द्र चौरे, लिखीराम यादव, बाबूलाल भारती,दिनेश,राहुल अमरे ज्ञापन देते समय मौजूद रहे।
