रायपुर, 11 अप्रैल (वार्ता) छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बस्तर संभाग और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए शनिवार को केंद्र सरकार से विशेष पैकेज की मांग करते हुए कई मुद्दों पर स्पष्ट नीति घोषित करने की जरूरत बताई है। पार्टी ने आदिवासियों के अधिकार, संसाधनों के संरक्षण और लंबित योजनाओं पर सरकार से जवाब मांगा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ और बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद समाप्त होने का दावा किया जा रहा है, ऐसे में अब क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से बस्तर के विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर घोषणाएं की जाती रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित प्रगति नहीं दिख रही है।
बैज ने केंद्र सरकार से बस्तर संभाग के लिए 50 हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की। उनका कहना है कि प्रत्येक पंचायत को एक करोड़ रुपये की सहायता देकर स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति दी जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि नक्सलवाद में कमी के बाद भी बस्तर के लिए विशेष आर्थिक सहायता की घोषणा अब तक क्यों नहीं की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि बड़े नक्सली मामलों में शामिल कई लोगों के आत्मसमर्पण के बाद उनके पुनर्वास की प्रक्रिया चल रही है, जबकि छोटे मामलों में कथित रूप से संलिप्त हजारों आदिवासी अब भी जेलों में बंद हैं। बैज ने ऐसे मामलों की समीक्षा कर निर्दोष आदिवासियों को रिहा करने की मांग की।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों में यह आशंका है कि जल, जंगल और जमीन जैसे संसाधनों को निजी उद्योगपतियों को सौंपा जा सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि बस्तर में स्थानीय लोगों की सहमति के बिना किसी बड़े औद्योगिक समूह को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
श्री बैज ने राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) का मुख्यालय बस्तर में स्थापित करने की भी मांग उठाई। उनका कहना है कि बस्तर से खनिज संपदा का दोहन होता है, लेकिन कंपनी का मुख्यालय अन्य राज्य में होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
नंदराज पहाड़ से जुड़े मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र आदिवासी समुदाय की आस्था से जुड़ा हुआ है और पूर्व में दी गई खनन लीज को रद्द करने के बावजूद अब तक केंद्र स्तर पर औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। उन्होंने इस पर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
नगरनार इस्पात संयंत्र के विनिवेश की संभावनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए बैज ने कहा कि यह परियोजना बस्तरवासियों की भावनाओं से जुड़ी है और इसे निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए। इसके अलावा बैलाडीला क्षेत्र की खदानों और कांकेर जिले की खदानों के आवंटन पर भी सवाल उठाए गए।
उन्होंने वन अधिकार अधिनियम में किए गए संशोधनों पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताते हुए कहा कि इससे आदिवासी समुदाय के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही राज्य में लंबित आरक्षण संशोधन विधेयक पर शीघ्र निर्णय लेने और दल्लीराजहरा-जगदलपुर रेल लाइन परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग भी की गई।
प्रदेश कांग्रेस ने कहा कि बस्तर क्षेत्र के विकास और आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे तथा लंबित मुद्दों पर स्पष्ट और समयबद्ध निर्णय जरूरी है।
