रूस में बंधक बनाए गए 26 भारतीयों की वतन वापसी के लिए सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार को तत्काल राजनयिक कदम उठाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट रूस में कथित तौर पर हिरासत में लिए गए और यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किए गए 26 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी की याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को केंद्र सरकार से निर्देश लेने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि ये भारतीय नागरिक युद्ध के मैदान में बेहद असुरक्षित स्थितियों में फंसे हुए हैं और उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध सैन्य गतिविधियों में शामिल होने के लिए विवश किया जा रहा है।

अदालत में दायर याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह रूस में भारतीय दूतावास के माध्यम से तुरंत कूटनीतिक और कॉन्सुलर कदम उठाए। इसमें वियना कन्वेंशन (1963) और द्विपक्षीय समझौतों के तहत इन भारतीयों तक कॉन्सुलर पहुंच प्रदान करने की बात कही गई है, ताकि उनकी वर्तमान कानूनी स्थिति और सुरक्षा का सटीक पता लगाया जा सके। सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को आश्वस्त किया है कि वह मामले की गहन जांच करेंगे और सरकार के निर्देशों के साथ अदालत को अवगत कराएंगे। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई इस महीने के अंत में तय की है।

याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहते हुए इन नागरिकों की गरिमा, सुरक्षा और भारत में उनकी वापसी के लिए सभी आवश्यक प्रयास करने चाहिए। यह मामला उस समय आया है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच कई भारतीयों के फंसे होने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब यह उम्मीद जगी है कि केंद्र सरकार इन युवाओं के ठिकाने का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित घर लाने की प्रक्रिया में तेजी लाएगी। आगामी सुनवाई में सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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