विमानों की सुरक्षा पर 5G नेटवर्क का साया, एविएशन रेगुलेटर ने दिसंबर 2027 तक एयरक्राफ्ट सिस्टम अपग्रेड करने के दिए सख्त निर्देश, जानें क्यों है खतरा

नई दिल्ली | भारत में 5G सेवाओं के तेजी से विस्तार के बीच विमानन सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। एविएशन रेगुलेटर डीजीसीए (DGCA) ने कमर्शियल एयरलाइंस को दिसंबर 2027 तक अपने विमानों के रेडियो अल्टीमीटर को अपग्रेड या रेट्रोफिट करने का आदेश दिया है। रेडियो अल्टीमीटर कॉकपिट का वह महत्वपूर्ण हिस्सा है जो जमीन से विमान की सटीक ऊंचाई मापता है, खासकर खराब दृश्यता, भारी बारिश या कोहरे के दौरान लैंडिंग के समय। विशेषज्ञों का मानना है कि 5G का C-बैंड (3.7–3.98 GHz) रेडियो अल्टीमीटर की फ्रीक्वेंसी (4.2–4.4 GHz) के बहुत करीब है, जिससे ‘स्पेक्ट्रल लीकेज’ का खतरा बढ़ जाता है। यह तकनीकी हस्तक्षेप पायलट को ऊंचाई का गलत डेटा दे सकता है, जो लैंडिंग के अंतिम 100 मीटर में बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) के अनुसार, एयरपोर्ट के पास लगे हाई-पावर 5G बेस स्टेशन विमान के लो-पावर रिसीवर सिग्नल्स को ओवरलोड कर सकते हैं। चूंकि ऑटो-लैंड फंक्शन, टेरेन अवेयरनेस और ऑटोपायलट सिस्टम पूरी तरह सटीक ऊंचाई के आंकड़ों पर निर्भर करते हैं, इसलिए गलत जानकारी मिलने पर नेविगेशन सिस्टम फेल हो सकता है। इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) ने भी चेतावनी दी है कि यदि अल्टीमीटर को ठीक से शील्ड नहीं किया गया, तो यह नागरिक विमानों के सुरक्षित संचालन के लिए बड़ी बाधा बन सकता है। वर्तमान में, जिन विमानों के सिस्टम अपग्रेड नहीं हैं, उन्हें खराब विजिबिलिटी के दौरान ऑटोमैटिक लैंडिंग की अनुमति नहीं दी जा रही है ताकि किसी भी संभावित जोखिम को टाला जा सके।

विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि 5G तकनीक को रोकना या एयरपोर्ट के पास नेटवर्क को पुराने 2G/4G पर डाउनग्रेड करना केवल एक अस्थायी समाधान है। एविएशन एक्सपर्ट अजय जसरा के अनुसार, वैश्विक स्तर पर विमानों के सिस्टम को आधुनिक बनाना ही एकमात्र स्थाई रास्ता है। भारत की 2027 की समय सीमा एयरलाइंस को अपने पूरे बेड़े को अपग्रेड करने के लिए पर्याप्त समय प्रदान करती है। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान एयरपोर्ट के आसपास रहने वाले लोगों को नेटवर्क सिग्नल में मामूली उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन वॉयस और बेसिक डेटा सेवाओं पर इसका कोई बड़ा असर नहीं होगा। अंततः, विमानों को सुरक्षा सावधानियों के तहत रेट्रोफिट किया जाएगा ताकि भविष्य में 5G क्रांति और विमानन सुरक्षा के बीच बेहतर तालमेल बना रहे।

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