इंदौर: नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण शहर के स्वच्छता में नंबर वन होने के दावों पर सवाल उठ रहे हैं. जमीनी हकीकत में कई क्षेत्रों में सफाईकर्मियों की अनुपस्थिति और गंदगी के ढेर शहर की छवि को धूमिल कर रहे हैं, जबकि निगम द्वारा सफाईकर्मियों को पूरा वेतन दिया जा रहा है.शहर के वार्ड 85 (फूटी कोठी, द्वारकापुरी, राम गली) में सफाई व्यवस्था ठप होने से निवासियों का जीना मुहाल है.
सफाई कर्मचारी नियमित नहीं आ रहे हैं, गंदगी के ढेर से बीमारियां फैलने का खतरा है. निवासियों को स्वयं सफाई करनी पड़ रही है. बार-बार शिकायत के बावजूद नगर निगम प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है. रहवासियों के अनुसार, सफाईकर्मी समय पर नहीं आते और अगर कभी आते भी हैं तो जानबूझकर कुछ क्षेत्र छोड़ देते हैं. कचरे के ढेरों के कारण मच्छर-मक्खियों का प्रकोप और गंदगी बढ़ रही है. शिकायत करने पर भी सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है, न ही कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जा रही है.
यह बोले रहवासी…
सफाई कर्मी आते नहीं हैं, अगर आ भी गए तो सड़क का हिस्सा छोड़ देते हैं, जिससे कचरता वहीं पड़ा रहता है. जिसके घर के आगे गंदगी रहती है, मजबूरन उसे ही सड़क पर झाड़ू लगाना पड़ती है.
– रानी अजमेर
त्योहारों के अलावा हर महीने बीस से पचास रुपए भी हम सफाईकर्मियों को इनाम देते हैं, फिर भी वह ईमानदारी से अपना कार्य नहीं करते. कहने के बावजूद वह सुनते ही नहीं, आब किसको बोलें.
– सोना बाई
कचरा गाड़ी नियमित तो आती है, लेकिन सफाई कर्मी तो कई-कई दिन तक गायब रहते हैं, जिससे क्षेत्र की स्वच्छता खत्म हो रही है. सफाई कर्मियों की लापरवाही को अधिकारियों को संज्ञान में लेना चाहिए.
– प्रियंका साहू
