इंदौर: नगर निगम परिषद बैठक में राजनीतिक दलों ने दो दिन पहले वंदे मातरम गाने का मुद्दा बनाया. उक्त मुद्दा बनाने के पीछे एक सुनियोजित योजना है, जिसमें शहर की तमाम समस्याओं और परेशानी पर बात करने से बचना मुख्य लक्ष्य माना जा सकता है. वर्तमान परिस्थिति में शहर के हालात हर मोर्चे पर बहुत खराब है. फिर भागीरथपुरा में गंदे पानी से लोगों का मरना, भाजपा परिषद को दागदार कर गया.पिछले दो दिनों से वंदे मातरम नहीं गाने पर पार्षद फौजिया शेख को लेकर राजनीतिक दल सड़कों पर उतर आए हैं. नेता लोग यह भूल गए कि भागीरथपुरा में दूषित पानी से 36 लोगों की मौत हुई है. इससे बढ़कर यह है कि पूरे शहर में गंदे पानी की शिकायतों का विवरण नहीं दिया जा रहा है.
गंदे पानी की समस्या का हल करना एक तरफ हो गया…
ऐसा माना जाता है कि मुस्लिम पार्षदों को राजनीतिक दल सुनियोजित योजना के तहत जीतने में सहायता करते हैं. इसके बाद जीते मुस्लिम पार्षदों का समय-समय पर मुद्दों खासकर शहर में सड़क, गंदे पानी की समस्या, ड्रेनेज, यातायात सहित अन्य समस्याओं पर चर्चा या बहस से बचने के लिए योजनाबद्ध तरीके से उपयोग किया जाता है. ऐसी चर्चा पिछले दो दिनों से शहर के राजनीतिक हल्कों में चल भी रही है कि नेता लोग शहर की समस्याओं का निराकरण करने में असफल हो रहे हैं.
सबसे बड़ा उदाहरण है भागीरथपुरा. उसके बाद शहर में प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष का वाटर ऑडिट, जिसमें हर इलाके में गंदे पानी के समस्या पाई गई. भागीरथपुरा घटना के बाद कतिपय नेता आक्रामक मुद्रा में है और उक्त मामले को पूरे देश में चर्चा का विषय बनाने में सफल भी रहे. ऐसा कहा जा रहा है कि कतिपय नेता पार्षदों के सवालों पर बहस से बचने की रणनीति बनाकर बैठक में आए थे. यही कारण था कि इस बार परिषद में सभापति के आसंदी का सत्ता पक्ष के लोगों ने निरंतर घेराव किया, जिसमें वंदे मातरम् भी एक मुद्दा है.
राजनीतिक हलकों और खासकर जनता के बीच भी यह चर्चा शुरू हो गई है कि वंदे मातरम् को लेकर जितने सक्रिय नेता हुए, यदि उतने सक्रिय शहर की समस्याओं ,खुदी सड़कें, गली गली में खुदाई, मुख्य मार्गो पर गंदगी और सबसे बड़ी और विकराल रूप धारण करती यातायात बदहाली पर सोचते तो बेहतर रहता. जनता की अपेक्षा भी यही है कि शहर की समस्याओं पर भी नेताओं की सक्रियता इसी तरह होना चाहिए जैसी अभी चल रही है.
