
इटारसी। भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए भोपाल लोकायुक्त की टीम ने आज केसला जनपद पंचायत में एक सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के कार्यालय में चल रहे रिश्वतखोरी के नेक्सस का भंडाफोड़ करते हुए टीम ने सहायक विकासखंड प्रबंधक सहित तीन लोगों को 20,000 रुपय की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
मानदेय के नाम पर ‘उगाही’ : पशु सखी को दी नौकरी से निकालने की धमकी
मामला जनपद पंचायत केसला का है, जहां आवेदिका श्रीमती सुनैया बरकडे पशु सखी के रूप में कार्यरत हैं। फरवरी 2026 में उन्हें उनके कार्य के बदले 29,700 रुपये का मानदेय प्राप्त हुआ था। आरोप है कि सहायक विकासखंड प्रबंधक धर्मेन्द्र गुप्ता ने आवेदिका पर दबाव बनाया कि उसने काम कम किया है और अधिकारियों ने साठगांठ कर उसका ज्यादा मानदेय बनवाया है।
गुप्ता ने आवेदिका से 25,000 रुपये की अवैध मांग की और धमकी दी कि यदि पैसे नहीं दिए, तो उसे काम से निकालकर किसी अन्य महिला को पदस्थ कर दिया जाएगा। मिन्नतें करने के बाद सौदा 20,000 रुपये में तय हुआ।
लोकायुक्त का जाल और रंगे हाथों गिरफ्तारी
सुनैया बरकड़े की शिकायत पर लोकायुक्त एसपी दुर्गेश कुमार राठौड़ ने जाल बिछाया। शुक्रवार, 10 अप्रैल को जैसे ही आवेदिका रिश्वत की राशि लेकर कार्यालय पहुंची, टीम ने दबिश दी। मुख्य आरोपी धर्मेन्द्र गुप्ता ने यह राशि क्लस्टर फेडरेशन मैनेजर श्रीमती कामिनी राजपूत और चपरासी कृष्णा धुर्वे के माध्यम से स्वीकार की। मौके पर मौजूद लोकायुक्त दल ने तीनों को धर दबोचा।
इन अधिकारियों की रही मुख्य भूमिका
पुलिस महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देश एवं डीआईजी मनोज सिंह के मार्गदर्शन में हुई इस कार्रवाई में लोकायुक्त की टीम ने पूरी सतर्कता बरती। ट्रैप दल में डीएसपी अजय मिश्रा, निरीक्षक रजनी तिवारी, घनश्याम मर्सकोले और प्रधान आरक्षक रामदास कुर्मी सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज
पकड़े गए तीनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) की धारा-7 और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई से जनपद पंचायत और मिशन के अन्य कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। खबर लिखे जाने तक लोकायुक्त की टीम आरोपियों से पूछताछ और दस्तावेजी कार्रवाई में जुटी थी।
