निजाम बदला और बदल गया मिजाज….

महाकौशल की डायरी अविनाश दीक्षित। नगर सत्ता और प्रशासन के खिलाफ विपक्ष के नेता अगर आवाज बुलंद करें तो समझ में आता है कि विषय को राजनैतिक उद्देश्यों से जोड़ा जा रहा है लेकिन कहीं अगर भाजपा के ही विधायक अपनी सरकार या जिला प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद करें तो हैरानी की बात होगी ही। अक्सर अपनी पार्टी के कद्दावर नेताओं के खिलाफ मुखर रुख अपना लेने वाले जबलपुर के पाटन से विधायक व भाजपा के कद्दावर नेता अजय विश्रोई ने जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह पर पुस्तक मेले में ध्यान न देने का आरोप लगाते हुए अपने एक्स एकाउंट में पोस्ट करते हुए जैसे ही लिखा कि निजाम बदला और बदल गया मिजाज .. तो चर्चाओं का नया बाजार गर्म हो गया। वहीं विपक्ष के खेमे में भी विधायक की पोस्ट को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हुईं। पोस्ट में विधायक ने स्पष्ट लिखा कि वर्ष 2024 में पूर्व कलेक्टर दीपक सक्सेना ने जबलपुर में पुस्तक मेले की शुरूआत की थी जिसका मुख्य उद्देश्य था कि अभिभावकों को कम दामों में पुस्तक मिलेंगीं। लेकिन इस बार मौजूदा कलेक्टर की ढीलाढाली के चलते पुस्तक विक्रेताओं के हौंसले बुलंद हैं और ऊंचे दामों में अभिभावकों को बच्चों की पुस्तकें मेले में मिल रहीं हैं। कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि भाजपा विधायक ने पुस्तक मेले की अनियमितताओं को लेकर प्रशासन की हकीकत दिखाने की कोशिश की। विधायक का ये तंज जिला प्रशासन के जिम्मेदारों को कांटे की तरह चुभ रहा है। देखना होगा कि विधायक की पोस्ट का असर जिला प्रशासन पर किस हद तक पड़ता है और बाजार में अब भी चल रही पुस्तक विक्रेताओं की मनमानी पर फिर से रोक लगती है या नहीं। उधर भाजपा के अन्य विधायकों व पार्टी कार्यालय में अंदरूनी चर्चाएं व्याप्त हैं कि विधायक जी को कोई समस्या थी तो वह व्यक्तिगत रूप से कलेक्टर से बात कर लेते, सार्वजनिक रूप से प्रशासनिक हकीकत दिखाने की क्या जरूरत थी…? बहरहाल ऐसे सवाल किसी ने विधायक के सामने नहीं पूछे, मगर भाजपाईयों के बीच यह सवाल मेला समाप्त होने के बाद भी सुर्खियों में है।

खुशियां ऐसी मनाईं जैसे लग गई हो लॉटरी

जबलपुर के स्वास्थ्य विभाग के इतिहास में कुछ दिन पहले वो हुआ जो शायद आज तक नहीं हुआ। हुआ ये कि पहले तो स्वास्थ्य विभाग में घोटाले के आरोप में सीएमएचओ डॉ संजय मिश्रा को निलंबित करके भोपाल अटैच किया गया और फिर शहर की सड़कों में आतिशबाजी के बाद लड्डू बांटकर ऐसी खुशियां मनाईं गईं जैसे किसी की लॉटरी लग गई हो। मालवीय चौक में आतिशबाजी, लड्डू वितरित होता देख आमजन ने पूछा कि भाई ये जश्र किस चीज का है तो आयोजकों से जवाब मिला कि भाई आप तो मिठाई खाईए, अपने जबलपुर के स्वास्थ्य विभाग में बीते 2 सालों से जमी सिंडीकेट की चेन टूट गई है और सीएमएचओ साहब निलंबित होकर चले गए हैं। मतलब साफ था कि भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों से घिरे सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा के जाने की खुशी सभी को थी और उनके जाने के बाद जश्र सड़कों पर भी मनाया गया। विदित हो कि संजय मिश्रा के कार्यकाल में गलत मापदंड होने के बावजूद जबलपुर के एक भी बड़े अस्पताल में ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई जिससे संचालकों में कोई भय का माहौल हो। उनका कार्यकाल वैसे भी जबलपुर में विवादों से घिरा रहा है, उन पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप भी लग चुके थे। समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों ने तो स्पष्ट कहा कि जबलपुर के अस्पतालों से सीएमएचओ की फुल सेटिंग थी और काले कारनामे सब अस्पतालों में इन मिलीभगत से फल फूल रहे थे। उधर विरोध स्वरूप जबलपुर में नजर आए पोस्टरों में लिखा था कि जबलपुर के स्वास्थ्य विभाग में अब भ्रष्टाचार का अंत हुआ है। विभागीय सूत्रों की मानें तो भोपाल के भी स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी, मंत्रियों तक डॉ. संजय मिश्रा के विरोध, भ्रष्टाचार की खबर पहुंच चुकी है जिसके बाद रडार पर अब वह और गहरे रूप से आ गए हैं। खबर है कि सीएमएचओ की संलिप्तता से भोपाल की सिंह इंटरप्राइजेज कंपनी को 12 फर्जी बिलों के जरिए करीब 93.04 लाख रुपए का भुगतान करने के मामले में जांच दल द्वारा साक्ष्य तो जुटा लिए गए हैं जिससे एफआईआर पुलिस थाना में दर्ज की जा सके लेकिन मिश्रा और कुछ उनके चाहने वाले इस एफआईआर को दर्ज नहीं करवाने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर भी लगा रहे हैं। नतीजा भी फिलहाल तो नजर आ रहा है कि विभागीय जांच का हवाला देकर अभी एफआईआर से डॉ संजय मिश्रा का नाम दूर रखा गया है। जानकारों की मानें तो घोटाला पूरी तरह से धोखाधड़ी से जुड़ा है और इसमें डॉ मिश्रा के खिलाफ नामजद एफआईआर होनी चाहिए लेकिन सवाल ये है कि क्या जुगाड़ कामयाब होगा या फिर प्रशासनिक सख्ती के चलते एफआईआर संभव होगी…?

पिंजरे की जाली तोड़कर भागा तेंदुआ…!

वेटरनरी यूनिवर्सिटी के वाइल्ड लाइफ सेंटर में आने वाले वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर प्रबंधन कितना गंभीर है , इसकी पोल उस वक्त खुली जब नरसिंहपुर जिले से इलाज के लिए यहां आया तेंदुआ पिंजरे से अचानक गायब हो गया। खबर फैली कि तेंदुआ पिंजरे की जाली तोड़कर निकल गया है। जाहिर है कि जो जाली थी वो कमजोर अवस्था में थी जिस कारण इतनी बड़ी गफलत हुई। आनन फानन में वन विभाग को सूचना देकर बुलाया गया और तत्काल वेटरनरी यूनिवर्सिटी के वाइल्ड लाइफ सेंटर के सभी गेट बंद कराए गए और इमरजेंसी सर्चिंग अभियान शुरू किया गया। प्रबंधन की सांस में सांस तब आई उस जब उन्हें पता चला कि तेंदुआ बड़े पिंजरे के किनारे बैठा है। खबर है कि मौके पर पहुंचकर वन विभाग की टीम ने ट्रैक्विलाइज गन से उसे पहले बेहोश किया, इसके बाद उसे वापस केज में डाला।उधर तेंदुआ के पिंजरे से निकलने की घटना के बाद सेंटर के अधिकारी अब बाड़े या पिंजरे में टूटी जाली और दीवार के पास छूटी हुई जगह को भी पैक कराने के लिए बेल्डिंग और मरम्मत कराने में जुट गए हैं।

गनीमत रही कि तेंदुआ वेटरनरी यूनिवर्सिटी परिसर में और कहीं नहीं गया तो नहीं वो कितने शिकार करता जिसका अंदाजा लगाया जाना भी मुश्किल था।

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