
मुरैना, 25 जून (वार्ता) मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मंत्री लोकेंद्र पाराशर ने आज कहा कि संविधान की धज्जियां उड़ाकर देश में पचास साल पहले आपातकाल लगाने वाले दल से जुड़े नेता ही आज संविधान की प्रतियां हाथ में लेकर इसकी दुहायी दे रहे हैं।
देश में आपातकाल लगने के 50 वर्ष पूरे होने श्री पाराशर ने यहां पत्रकार वार्ता में कहा कि उस समय की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए देश में आपातकाल लगाया था। उस समय नियम कानून और संविधान सबको कुचल दिया गया था। और अब इसी दल से जुड़े कांग्रेस के नेता संविधान की दुहायी देते हुए घूम रहे हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि कुछ वर्षों से विपक्ष के नेता देश में स्वस्थ और मजबूत लोकतांत्रिक वातावरण होने के बावजूद संविधान की प्रति लेकर घूम रहे हैं और बात बात में संविधान को बचाने की बात करते हैं। इसलिए देश में आपातकाल लगाने की घटना को याद करना आवश्यक है। इस बारे में नयी पीढ़ी को भी पता चलना चाहिए। लोगों को पता चलना चाहिए कि उस समय कैसे एक प्रधानमंत्री ने सत्ता बचाने के लिए देश को आपातकाल में झोंक दिया।
श्री पराशर ने कहा कि आपातकाल लगाने का निर्णय किसी युद्ध या आंतरिक विद्रोह के कारण नहीं, बल्कि एक प्रधानमंत्री के लोकसभा चुनाव रद्द होने और अपनी सत्ता बचाने की हताशा में लिया गया राष्ट्र विरोधी निर्णय था। कांग्रेस पार्टी ने आपातकाल के इस “क्रूरकाल” में न केवल संवैधानिक ढांचे को कुचला, बल्कि उसके द्वारा प्रेस की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की निष्पक्षता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को भी भंग किया गया।
उन्होंने कहा कि 21 महीने के आपातकाल का “क्रूर” समय नागरिकों पर हुए अत्याचारों की दारुण गाथा है। उस समय लोकतंत्र में आस्था रखने वाली हर आवाज को दबाया गया। “मीसा” जैसे काले कानून में लगभग एक लाख लोगों को बिना किसी सुनवाई के जेलों में डाला गया। वह दौर लोकतंत्र के लिए काला अध्याय था।
