व्यावरा/राजगढ़: समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू करने के ठीक पहले हड़ताल कर कलेक्टर पर दबाव बनाने वाले सहकारी बैंक कर्मचारियों को कलेक्टर ने आईना दिखा दिया है. कलेक्टर ने कलमबंद हड़ताल कर किसानों के समक्ष और जिला प्रशासन के समक्ष संकट पैदा करने पर आज बड़ा निर्णय लेते हुए करीब 124 कर्मचारियों को अपात्र घोषित कर दिया है. अपात्र घोषित होने के बाद इनका यह अधिकार ही नहीं बनता है कि वे हड़ताल के बहाने अपनी पदोव्रति अथवा अपनी अन्य मांगों को मनवाने का दबाव बनाएं.
उल्लेखनीय है कि इन सहकारी बैंक कर्मचारियों के द्वारा पिछले करीब एक डेढ़ वर्षों से कलेक्टर बिना समिति की सहमति के कागजों पर लगी नौकरी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले में करीब 140 सहकारी समितियों में सहायक प्रबंधक अथवा सेल्समेन के पद पर बिना किसी नियमावली का प्रयोग करते हुए नियुक्ति दी गई थी इसमें या तो राजनीतिक प्रभुत्व का उपयोग किया गया अथवा अन्य व्यवस्था से नौकरी प्राप्त कर काम शुरू कर दिया बैंक के रिकार्ड में वे कर्मचारी जरूर हो गये और काम भी करने लगः गये लेकिन जिस सिस्टम से बैंक में नौकरी दी जाती है उसका कोई पालन नहीं किया गया.
जानकारी के अनुसार जब किसी कर्मचारी को बैंक में रखा जाता था तो उस समय एक समिति होती थी. जिसमें बैंक महाप्रबंधक, जिला पंजीयक और बैंक का चेयरमेन अथवा प्रशासक के तौर पर कलेक्टर आदि राजगढ़ जिले में सहकारी बैंक में जिस तरीके से नियुक्ति की वह नियम के अनुरूप नहीं की गई निर्धारित समिति से सहमति बमुश्किल 20 प्रतिशत कर्मचारियों के पास ही रही बाकी सभी केवल दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी की तरह काम कर रहे है.
को ज्ञापन, मांग पत्र देकर अपनी बात कही जा रही थी. कलेक्टर डॉ गिरीश कुमार मित्रा द्वारा सहानुभूति पूर्वक उनकी मांगों पर विचार करते हुए आने वाले समय में समस्याओं के निराकरण का
आश्वासन दिया गया था. इसी आश्वासन और सहानुभूमि को कर्मचारियों ने अपना अधिकार समझते हुए यह मान लिया कि प्रशासन केवल आश्वासन दे रहा है. हमारे अधिकारों के प्रति सजग, सतर्क और कर्तव्यशील नहीं है.
इस तथ्य को देखते हुए जिले की सभी 140 सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने सामुहिक संगठन बनाकर हड़ताल की धमकी दे दी. इस धमकी को आगे बढ़ाते हुए कर्मचारियों ने समर्थन मूल्य को खरीदी के ठीक पूर्व हड़ताल करने का निर्णय लेकर जिला प्रशासन व सरकार के समक्ष एक संकट खड़ा कर दिया. इस संकट का सामना करते हुए जिला प्रशासन ने अंततः पदोत्रति की मांग करने वाले कर्मचारियों की जानकारी जुटाई तो पता चला कि इनमें करीब 124 सहकारी कर्मचारी ऐसे भी है जो विधिवत बैंक में नियुक्त नहीं हुए है. इसके बावजूद वे हड्ताल कर प्रशासन और सरकार के खिलाफ खड़े हो गये है. इनके द्वारा दबाव बनाकर नियमविरूद्ध तरीके से अपनी मांग की जा रही है.
अपात्र कर्मचारियों की सूची चस्पा की
सहकारी समितियों के सहायक, प्रभारी तथा ऑपरेटर, चौकीदार सहित सहकारिता कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के बाद हरकत में आप जिला प्रशासन और बैंक प्रबंधन ने आज अपात्र कर्मचारियों की सूची चस्पा कर सभी को चौका दिया सूत्रों के अनुसार जब इन बैंक कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं से अवगत कराया और खुद को स्थायी बैंक कर्मियों की तरह अपनी मांगे पूरी करने व पदोन्नति देने की मांग की गई तो कलेक्टर ने आने वाले दिनों में जब पड़ताल कर उनकी मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया कलेक्टर के इसी आधारान को अधिकार समझते हुए उन्होंने जब समर्थन मूल्य की खरीदै शुरू होने के पूर्व हड़ताल, आदोलन का निर्णय लिया तो बताते है कि कलेक्टर ने सभी का रिकार्ड खगाला इस रिकार्ड में पता बता कि 124 कर्मवारियों की नियुक्ति का आधार ही नहीं मिला है. यह मांग कर रहे है कर्मचारी-कर्मचारियों की मागो में पैक्स सहकारी संस्थाओं में कार्यरत समस्त सहायक समिति प्रबंधकों में से समिति प्रबंधकों के 60 प्रतिशत पदों पर पदोत्राति की प्रक्रिया समय सीमा में पूर्ण की जाये पात्र-अपात्र सूची का प्रकाशन किया जाये पैक्स संस्थाओं के निलंबित ऑपरेटरों को तत्काल बहाल किया जाये कर्मचारियों को प्रतिमाह वेतन का भुगतान किया जाये जिन शाखाओं द्वारा विक्रेताओं को देव वेतन 10 ०हजार 500 के अलावा अतिरिक्त मानदेय राशि का भुगतान नहीं किया है उन्हें तत्काल भुगतान कराया जाये.
15 दिन में पेश कर सकते हैं दावा-आपत्ति
सीसीबी के अनुसार संबंधित कर्मचारी सूची को लेकर अपने दावा-आपति 15 दिवस के भीतर पेश कर सकते है सीसीबी राजगढ़ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रघुवंशी के अनुसार 60 प्रतिशत पदों पर पदोन्नति के माध्यम से पूर्व से कार्यरत कर्मचारियों के द्वारा भर्ती करना थी इसके लिए 124 आवेदन आये थे. कलेक्टर डॉ गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा बनाई कमेटी द्वारा दस्तावेज चेक किए गये गुरुवार को पदोचति के लिए पात्र-अपात्रों की सूची का प्रकाशन किया गया इसमें 124 नामों की सूची जारी की है संबंधित कर्मचारी सूची को लेकर 15 दिन में दावा-आपति पेश कर सकते है।
