जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने अपने एक आदेश में साफ किया कि मिथ्या प्रतिवेदन, गलत दस्तावेज या धोखाधड़ी से प्राप्त लाभ टिक नहीं सकता। पति शासकीय कर्मी है, अत: बीपीएल श्रेणी का लाभ अनुचित है। इसी आधार पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नियुक्ति विवाद संबंधी पुष्पा ठाकरे की याचिका निरस्त की जाती है। हाईकोर्ट ने संभागायुक्त के 17 अप्रैल 2025 के आदेश को युक्तियुक्त पाते हुए यथावत रखा। साथ ही याचिका निरस्त कर दी।
दरअसल इस फैसले से यह भी स्पष्ट हुआ कि भर्ती प्रक्रिया में किए गए किसी भी कुचेष्टा या दस्तावेजों की जालसाजी को हाईकोर्ट संरक्षण नहीं देगा। अनावेदक की ओर से अधिवक्ता सुदीप सिंह सैनी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने बीपीएल श्रेणी का लाभ लेने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर किया था, जबकि उसके पति सरकारी सेवा में कार्यरत थे।
न्यायालय ने इस दलील और रिकार्ड के आधार पर पाया कि याचिकाकर्ता के पति सरकारी कर्मचारी थे, अत: वह बीपीएल श्रेणी की पात्र नहीं थी। याचिकाकर्ता ने बीपीएल कार्ड में पति का नाम हटाकर देवर का नाम जोडक़र गलत लाभ लेने का प्रयास किया। पारिवारिक विवरण और राशन कार्ड की एंट्री में गंभीर विसंगतियां थीं। बीपीएल के अतिरिक्त 10 अंकों का लाभ लेकर उसकी मैरिट बढ़ी, जो धोखाधड़ी के आधार पर प्राप्त था।
