उज्जैन:जो महात्मा धूनी रमाते है, कंदराओं में तपस्या करते हैं, आश्रमों में धर्म कार्य करते हैं, भोजन भंडारे और सेवा करते हैं, भगवान के पूजन अर्चन में संलग्न रहते हैं, श्रद्धालुओं को कथा के माध्यम से आशीर्वचन देते हैं, देश-विदेश में यात्राएं कर धर्म जागरण करते हैं ऐसे सभी संत महंत गुरुवार को महाकुंभ की तैयारी का अवलोकन करने के लिए घाट, नदी से लेकर दूरस्थ अंचलों में पहुंचे.दरअसल, संत महंत समुदाय के लिए ही महाकुंभ का आयोजन वर्षों से परंपरा अनुसार होता आया है, जिसमें सभी 13 अखाड़ों के संत महंत महामंडलेश्वर अपनी अपनी पूजन परंपरा और स्नान के रीति रवाज के साथ कुंभ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते आए हैं.
धर्म अध्यात्म की अलख जगाने वाले ऐसे सभी संतों के आगमन पर महाकुंभ के दौरान मध्य प्रदेश सरकार उज्जैन जिला प्रशासन मूलभूत सुविधाएं जुटाता आया है, उसी तारतम्य में कुंभ के अंतर्गत उज्जैन शहर में चल रहे निर्माण और विकास कार्यों का गुरुवार को संतों और प्रशासनिक अधिकारियों ने संयुक्त रूप से अवलोकन किया. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने संत-महात्माओं के साथ विभिन्न परियोजनाओं का भ्रमण कर उन्हें कार्यों की प्रगति से अवगत कराया.
मुख्यमंत्री डॉ यादव की परिकल्पना
दरअसल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सार्वजनिक मंच से कई बार कहा है कि इस बार का कुंभ सबसे अलग होगा क्योंकि वर्ष 1964 के बाद पहली बार शिप्रा के संग्रहीत जल से कुंभ में स्नान कराया जाएगा. गंभीर डैम, नर्मदा नदी के जल से अब तक वैकल्पिक संसाधनों के माध्यम से सिंहस्थ में स्नान होता आया है, इस बार सेवएखेड़ी सिलारखेड़ी क्षेत्र में वर्षा का जल संग्रहित कर क्षिप्रा में लिफ्ट करेंगे और उसी जल से कुंभ स्नान होगा.
त्रिवेणी घाट से शुरुआत
गुरुवार को संतों और अफसरों की भ्रमण यात्रा त्रिवेणी क्षेत्र स्थित शनि मंदिर के पास निर्माणाधीन घाट से हुई. संतों ने क्षिप्रा नदी के तट पर बनाए जा रहे नए घाटों को देखा, अधिकारियों ने बताया कि लगभग 29 किलोमीटर लंबाई में घाटों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ स्नान कर सकेंगे. उज्जैन संभाग आयुक्त सह सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह और उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने संतों से वार्तालाप किया.
रामादल के सदस्य हुए एकत्रित
रामादल के संतों का दल चिंतामन-जवासिया क्षेत्र पहुंचा, जहां क्षिप्रा शुद्धिकरण योजना के अंतर्गत कान्ह नदी डायवर्सन परियोजना का अवलोकन किया गया. संत 24.5 मीटर गहराई में बन रही टनल तक उतरे और निर्माण कार्य को देखा. अधिकारियों ने जानकारी दी कि करीब 30 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में क्लोज डक्ट और टनल का निर्माण किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य क्षिप्रा के जल को स्वच्छ और प्रवाहमान बनाना है.
आवागमन में सुविधा
हरिफाटक क्षेत्र में क्षिप्रा नदी पर बन रहे समानांतर पुल के निर्माण कार्य संतों ने देखे, प्रशासन ने संतों को बताया कि पुल तैयार होने के बाद सिंहस्थ के दौरान इंदौर, देवास और भोपाल की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन में सुविधा मिलेगी.
संतों ने जताया संतोष
रामादल अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रामेश्वरदास महाराज एवं ऋणमुक्तेश्वर मंदिर के पीठाधीश्वर महावीर नाथ जी महाराज सहित अन्य सभी संतों ने निर्माण कार्यों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया. संतों ने कहा कि क्षिप्रा शुद्धिकरण और घाट निर्माण जैसे कार्यों से आगामी सिंहस्थ महापर्व अधिक सुव्यवस्थित और भव्य होगा.
संत और अफसरों का संवाद
भ्रमण के दौरान विभिन्न अखाड़ों के संत-महात्मा, प्रशासनिक अधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे. निरीक्षण के बाद संतों और अधिकारियों के बीच संवाद भी हुआ, जिसमें सिंहस्थ की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों को लेकर विचार साझा किए गए
