
ग्वालियर चंबल डायरी हरीश दुबे। ऐसे वक्त जब ग्वालियर चंबल क्षेत्र में समूची भाजपा ‘मूल’ और ‘महल’ के बंटवारे में फंसी है और अंचल के दोनों छत्रपों सिंधिया और नरेन्द्र सिंह के बीच दूरियां साफ दिख रही हैं, पार्टी के सूबा सदर का चंबल के दोनों बड़े जिलों भिंड और मुरैना सहित ग्वालियर का दौरा करना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सियासी हलकों में सवाल यही पूछा जा रहा है कि क्या इस दौरे का मकसद मिशन 2028 के लिए पार्टी को एकजुट करते हुए नेताओं के गिले शिकवे दूर कर चुनावी चुनौतियों से मुक़ाबिल होने के लिए पार्टी को मजबूत करना है। फिलवक्त तो यही नजर आता है। अंचल के तीनों जिलों में जनप्रतिनिधियों से मुलाकात में यही निष्कर्ष उभरा कि इस अंचल से मिल रहे फीडबैक के प्रति वे गंभीर हैं और किसी भी सूरत में पार्टी में गुटबाजी पनपने या किसी भी नेता द्वारा इसे प्रश्रय देने के सख्त खिलाफ़ हैं। दरअसल, विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को स्थानीय निकाय के चुनाव समर में उतरना है। विगत निकाय चुनाव में अंचल की दोनों नगर निगम ग्वालियर और मुरैना भाजपा के हाथ से फिसल कर कांग्रेस के खाते में चली गई थीं, इसका मलाल आज तक भाजपा को है। बहरहाल, विधानसभा और निकाय चुनाव से पहले भाजपा अपनी कमीपेशियों को दूर कर खुद को हर मोर्चे पर मुकम्मल कर लेना चाहती है, सूबा सदर खंडेलवाल के आज के दौरे का यही मकसद माना जा रहा है। खंडेलवाल ने अपना दौरा मुरैना से शुरू किया और भिंड के बाद ग्वालियर पहुंचे। तीनों जगह उनका जबरदस्त स्वागत हुआ। मुरैना एवं भिण्ड में उनके द्वारा ली गई जिला बैठक, जिला जनप्रतिनिधि बैठक एवं छोटी टोली बैठक में खंडेलवाल ने प्रोटोकॉल की सीमाओं से ऊपर उठकर बेबाक और आत्मीय अंदाज में कार्यकर्ताओं से लेकर पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर उनकी बात सुनी, समस्याएं जानी और शिकायतों के निराकरण के लिए ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया। यह सच है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश प्रमुख खंडेलवाल के नेतृत्व और मार्गदर्शन में ही लड़ेगी। इस तरह भाजपा को फिर से जीत की दहलीज तक पहुंचाने में सीएम के साथ ही हेमंत खंडेलवाल की भी अहम भूमिका रहेगी। यही वजह है कि सूबा सदर ने मोर्चा संभाल लिया है। यह दौरे का पहला चरण था। वे दूसरे चरण में जल्द ही ग्वालियर, शिवपुरी और दतिया जिलों का भी ऐसा ही सघन दौरा करेंगे, जिसकी तैयारी भी शुरू हो गई है।
*हाईटेक दफ्तर बनाने में जुटा कमल दल*
अंततः भाजपा को नया सर्वसुविधायुक्त जिला कार्यालय मिलने का पथ प्रशस्त हो गया है। सिंधिया और नरेन्द्रसिंह ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अलापुर में भूमिपूजन किया। करीब साठ साल पहले महाराज बाड़े के समीप मुखर्जी भवन में जनसंघ के कार्यालय का शुभारंभ हुआ था जो अस्सी में भाजपा के दफ्तर के रूप में बदल गया। इस भीड़भाड़ वाले इलाके में पार्किंग की समस्या रहती है, लिहाजा कई साल तक रेसकोर्स रोड के 38 नंबर सरकारी बंगले से दफ्तर चलाया गया। पिछले कई लोकसभा और निगम चुनाव में भाजपा ने मानिक विलास स्थित मोदी हाउस को अपना ठौर बनाया। इस बीच सर्वसुविधासंपन्न जिला कार्यालय बनाने के लिए शहर में जगह की तलाश चलती रही, शहर के प्रवेश द्वार स्थित अलापुर पर जाकर यह तलाश पूरी हुई और साल भर में पार्टीजनों को नया हाईटेक दफ्तर मिल जाएगा।
*क्या चंबल में बेकाबू हो गया है रेत माफिया*
चंबल अंचल में रेत माफिया इतना बेखौफ है कि वह वन चौकियों, पुलिस थानों पर भी हमला करने से नहीं हिचकिचाता। यहां तक कि ठीक 14 साल पहले 8 मार्च 2012 को चंबल रेंज में आईपीएस अफसर नरेंद्र कुमार को रेत माफिया ने ट्रैक्टर ट्रॉली से कुचलकर मार डाला था। शहीद आईपीएस नरेंद्र की धर्मपत्नी आईएएस मधु रानी तेवतिया इन दिनों दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सचिव हैं। दिसंबर 2018 में भी रेत माफिया ने चंबल में तैनात डिप्टी रेंजर सूबेदार कुशवाहा को और इससे पहले मार्च 2015 में कांस्टेबल धर्मेंद्र चौहान को पत्थरों से भरी ट्रॉली से कुचलकर मार डाला था। आज बुधवार को फिर वही खौफनाक कहानी दोहराई गई जब रेत का अवैध परिवहन रोकने पहुंचे वन रक्षक हरकेश गुर्जर को रेत माफिया ने ऐन सुबह रेत से भरे ट्रैक्टर से कुचलकर मार दिया। जाहिर है कि राजनीतिक संरक्षण और महकमे में बड़े स्तर पर मिलीभगत के बगैर रेत माफिया के हौंसले इस कदर बुलंद नहीं हो सकते। जरूरत इस बात की है कि अपने पराए से ऊपर उठकर सख्त कदम उठाए जाएं
