
खंडवा। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की 16 वर्षीय नाबालिग पारिवारिक विवाद के बाद घर छोड़कर मुंबई काम की तलाश में जा रही थी। पवन एक्सप्रेस से यात्रा के दौरान वह खंडवा रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध स्थिति में मिली। इस दौरान रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने सतर्कता दिखाते हुए उसे सुरक्षित संरक्षण में लेकर बाल संरक्षण तंत्र तक पहुंचाया।
प्राथमिक पूछताछ में सामने आया कि पारिवारिक विवाद के कारण नाबालिग बिना किसी को बताए घर से निकल गई थी। उसके पिता फल का ठेला लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने और घरेलू विवाद के कारण वह काम की तलाश में मुंबई जाने के लिए निकल पड़ी थी।
मामले की जानकारी मिलने पर नाबालिग को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति की न्यायपीठ द्वारा नाबालिग की काउंसलिंग की गई, जिसमें उसे परिवार के महत्व और सुरक्षित भविष्य के बारे में समझाया गया। काउंसलिंग के बाद नाबालिग ने घर लौटने की सहमति जताई। इसके बाद समिति ने उसके परिजनों को सूचना देकर खंडवा बुलाया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद नाबालिग को माता-पिता के सुपुर्द कर दिया।
समिति के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में बाल कल्याण समिति इस प्रकार के मामलों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। उनकी संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता के चलते अब तक कई बच्चों को सुरक्षित संरक्षण देकर उनके परिवारों से मिलाया जा चुका है।
इस प्रकरण में समिति सदस्य मोहन मालवीय, रुचि पाटिल, स्वप्निल जैन और कविता पटेल का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। समिति की तत्परता से नाबालिग सुरक्षित अपने परिवार तक पहुंच सकी।
