
बड़वानी। बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती लापरवाही अब जानलेवा साबित हो रही है। जिला अस्पताल के डायलिसिस सेंटर से प्राप्त आंकड़े डराने वाले हैं, जहां इस वर्ष मार्च तक ही 1300 से अधिक डायलिसिस सेशन किए जा चुके हैं। वर्तमान में सेंटर पर हर महीने औसतन 450 से अधिक मरीजों का डायलिसिस किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीपी और शुगर के अनियंत्रित स्तर के साथ बिना डॉक्टरी सलाह के ली जाने वाली दवाइयां इस समस्या की मुख्य जड़ हैं। यदि लोग अब भी आदतों के प्रति सचेत नहीं हुए, तो आने वाले समय में जिले में किडनी रोगियों की संख्या और भयावह हो सकती है।
चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि किडनी खराब होने के लक्षण काफी देर से पता चलते हैं, इसलिए नियमित जांच ही एकमात्र बचाव है। किडनी खराब होने के पीछे सबसे बड़ा कारण लंबे समय तक दवाओं का सेवन और उनमें बरती जाने वाली लापरवाही है। अक्सर बीपी और शुगर के मरीज नियमित जांच कराए बिना सालों तक एक ही दवा लेते रहते हैं, जो धीरे-धीरे किडनी को डैमेज कर देती है। इसके अलावा, आम लोग सिरदर्द या बदन दर्द होने पर बिना डॉक्टरी परामर्श के पेनकिलर और हैवी एंटीबायोटिक्स का उपयोग करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये दर्द निवारक दवाएं सीधे तौर पर किडनी की कार्यक्षमता को खत्म कर रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि अधिकांश मरीजों को सप्ताह में 2 से 3 बार डायलिसिस की आवश्यकता पड़ रही है।
एक समय था जब किडनी की बीमारियां केवल बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन अब 20 से 50 वर्ष के युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार युवाओं में बढ़ता नशा, शराब, तंबाकू और मादक पदार्थों का सेवन किडनी फेलियर का प्रमुख कारण बन रहा है। खराब खान-पान व शारीरिक सक्रियता की कमी इस जोखिम को और बढ़ा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अपील की है कि 40 वर्ष की आयु पार कर चुके लोगों को साल में कम से कम एक बार अपना होल बॉडी चेकअप अवश्य कराना चाहिए।
साइलेंट किलर है ये बीमारी
मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ जोसफ सुलिया का कहना है कि किडनी की बीमारी एक साइलेंट किलर है। इसके लक्षण तब उभरते हैं जब किडनी 60 से 70 प्रतिशत तक डैमेज हो चुकी होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना और खुद से दवा का डोज तय करना सबसे भारी पड़ रहा है। बीपी और शुगर के मरीजों को हर 3 महीने में किडनी फंक्शन टेस्ट कराना चाहिए। शरीर में सूजन, भूख न लगना या पेशाब में दिक्कत जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तत्काल विशेषज्ञ से परामर्श ले। बिना जांच के दवाओं का सेवन किडनी को पूरी तरह छलनी कर सकता है।
